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ब्रह्मचर्य का नियमित पालन जरूरीः कृतार्थप्रभा श्रीजी

उदयपुर। श्वेताम्बर वासुपूज्य मंदिर ट्रस्ट की ओर से सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी कृतार्थ प्रभा श्रीजी ने श्रावक के नियम बताते हुए कहा कि...


उदयपुर। श्वेताम्बर वासुपूज्य मंदिर ट्रस्ट की ओर से सूरजपोल स्थित दादाबाड़ी में साध्वी कृतार्थ प्रभा श्रीजी ने श्रावक के नियम बताते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य का नियमित पालन करना अत्यावश्यक है। एक ही के प्रति समर्पण रखना चाहिए। फैशनेबल कपड़े नहीं पहनने चाहिए। मंदिर उपासरे में जाओ तो तरीके से कपड़े पहनकर जाएं। सामने वाले के मन में अपने को देखकर विकार उत्पन्न न हों। अब तो मंदिरों में भी लिखा जाने लगा है कि फटे कपड़े न पहनकर आएं। टीवी सीरियल देखने से बचें। आत्मा के आसपास चलना यानी ब्रह्मचर्य। भले ही रहते राजमहल में हों लेकिन पालन जरूर करें। कमल कीचड़ में खिलता है लेकिन कमल पर कभी गंदगी नही लगती।

उन्होंने कहा कि आज सोने का मंदिर बनाना आसान है लेकिन ब्रह्मचर्य का पालन मुश्किल है। स्थूलिभद्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गुफा के बाहर चार महीने तक तपस्या करना। ब्रह्मचर्य का पालन ऐसा कि अगर पति पत्नी का कमरा हसि तो उसके पास नहीं जाना कहीं कोई विकार मन में न आ जाये। लोक लाज में पहले पति पत्नी से सीधे बात भी नही करते थे अब आमने सामने कोई किसी को कुछ भी कह रहा है। एक के प्रति संतुष्टि रखी तो भी ब्रह्मचर्य का पालन हो सकता है। पहले अगर घर में ऐसा कुछ हो जाता तो एक दो साल तक घर से नहीं निकलते कि क्या मुंह दिखाएंगे। अब तो अमूमन हर घर की यही हालत हो गई है। हर घर के शीशे कांच के हैं। कौन किसको पत्थर मारे। आज बच्चे होस्टल में जाते हैं, आप कितना ध्यान रख लोगे। वो वहां क्या करता है, क्या पता।

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