उदयपुर । सिंधी समाज के आराध्य देव, वरुण अवतार भगवान झूलेलाल जी के जन्मोत्सव श्चेटीचंडश् की गूँज अब फिजाओं में सुनाई देने लगी है। इसी कड़ी में...
उदयपुर । सिंधी समाज के आराध्य देव, वरुण अवतार भगवान झूलेलाल जी के जन्मोत्सव श्चेटीचंडश् की गूँज अब फिजाओं में सुनाई देने लगी है। इसी कड़ी में शक्तिनगर स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर स्थित भगवान झूलेलाल मंदिर में नूतन ध्वजा रोहण के साथ आगामी कार्यक्रमों का विधिवत शुभारंभ हुआ। होली के उल्लास के बाद और चेटीचंड के पावन पर्व से पूर्व आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
पूज्य बिलोचिस्तान पंचायत के महासचिव विजय आहुजा ने बताया कि कार्यक्रम में विधि-विधान से हुआ ध्वज पूजन। कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के शिखर पर नया ध्वज स्थापित करने के साथ हुई। ध्वजा रोहण से पूर्व मुख्य पुजारी और समाज के वरिष्ठ जनों द्वारा ध्वज की श्रद्धापूर्वक आरती और विशेष पूजन किया गया। जैसे ही मंदिर के शिखर पर भगवान झूलेलाल का नूतन ध्वज लहराया, पूरा मंदिर परिसर श्जय झूलेलालश् और श्आयो लाल झूलेलालश् के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
लोक कल्याण की कामना ध्वज स्थापना के पश्चात भगवान झूलेलाल की भव्य आरती की गई और पारंपरिक श्पल्लवश् (अरदास) की रस्म निभाई गई। इस अवसर पर सामूहिक रूप से भगवान झूलेलाल की चालीसा का पाठ किया गया। श्रद्धालुओं ने वरुण देव श्री झूलेलाल जी से प्रार्थना की कि वे पूरे शहर और देश की रक्षा करें, खुशहाली लाएं और सभी पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
अतिथियों का सम्मान और गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता का नजारा भी देखने को मिला। पंचायत के अध्यक्ष नानक राम कस्तूरी ने कार्यक्रम में द्वारा समस्त अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। पंचायत के उपाध्यक्ष जितेंद्र तलरेजा ने अतिथियों को सम्मान स्वरूप उपराणा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। झूलेलाल सेवा समिति के अध्यक्ष प्रताप राय चुघ सहित विभिन्न पंचायतों से आए गणमान्य जन इस अवसर पर उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से पूर्व राज्य मंत्रीहरीश राजानी, मुरली राजानी, ओमप्रकाश आहूजा,अशोक गेरा, सुखराम बालचंदानी, सुनील कालरा, प्रकाश फुलानी ।
व्यवस्था में इनका रहा सहयोग
कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में नरेंद्र क्थूरिया, मनीष डेम्बला, जय सपरा, अशोक खथूरिया, धीरज तुलसीजा, ओम जी खथुरिया, मुकेश गखरेजा, विजय कस्तूरी, कमल तलरेजा और हरीश भाटिया का विशेष योगदान रहा। मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था बसंत कस्तूरी और सुरेन्द्र अरोड़ा ने बखूबी संभाली।
इस कार्यक्रम के साथ ही समाज में चेटीचंड की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। आने वाले दिनों में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

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