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नदियों को सजाने के नाम पर दे रहे है हम गंभीर सजा

समाधान का एक ही एक्शन : लौटाओ नदियों का फ्लड प्लेन...उनका  मूल सेक्शन  डॉ अनिल मेहता  14 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नदियों के लिए ...

समाधान का एक ही एक्शन : लौटाओ नदियों का फ्लड प्लेन...उनका  मूल सेक्शन 

डॉ अनिल मेहता 

14 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नदियों के लिए कार्रवाई दिवस ( इंटरनेशनल डे ऑफ एक्शन फॉर रिवर्स) मनाया जाता है। यह दिन हमें  याद दिलाता है कि नदियाँ केवल पानी की  निर्जीव धाराएँ नहीं, कोई नहर नहीं, कोई नाला  नहीं बल्कि एक  जीवित व गतिशील पारिस्थितिक तंत्र तथा प्राकृतिक , ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत  हैं।  नदियां वह जीवनदायिनी स्रोत है जो   संस्कृति और प्रकृति दोनों को पोषण देती  हैं। लेकिन विडंबना यह है कि आज विकास के नाम पर , रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर  नदियों पर निरंतर  आघात  हो रहे है।

नदियां हमारी  सभ्यता का केंद्र है। अंतरराष्ट्रीय नदियों के लिए कार्रवाई दिवस हमें यही याद दिलाता है कि नदियों को बचाना केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि सभ्यता, संस्कृति और भविष्य का प्रश्न है। आज आवश्यकता इस बात की है कि  हम अपनी महान जल विरासत को समझे और नदियों को  उनके  मूल स्वरूप और प्राकृतिक प्रवाह के साथ पुनः जीवित करे।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस नदियों  के साथ जो  " अप्राकृतिक, अवैध कार्रवाईया" हुई  है, उसने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है— नदी को सजाने  के नाम पर उन्हें  सजा दी जा रही है !!!???

नदी के सौंदर्यीकरण यानी ब्यूटीफिकेशन के नाम पर जो कॉन्क्रीटाइजेशन , व्यावसायीकरण, नदियों को एक चैनल में बदलने के जो कार्य हो रहे है वे  वास्तव में  तो नदी तंत्र के लिए एक  बड़ी सजा  है।

नदियों में साफ पानी नहीं बल्कि गंदा पानी बह रहा है। कई जगह सिवरेज  के नाले , इंडस्ट्रियल एफलुएंट सीधे नदी में गिर रहे हैं। कई स्थानों पर कचरा खुले तौर पर नदी में फेंका जाता  जाता है।  दुखद यह है कि  सीवेज, कचरा, केमिकल वेस्ट, अतिक्रमण, जैव विविधता  ह्वास जैसे मूल संकटों का   हल करने के बजाय केवल उसके  सौंदर्यीकरण करने के कार्य हो रहे है। नदियों रुपी हमारी  ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ बुरा व्यवहार  हर संवेदनशील नागरिक को कचोटता है। नदी के पेटे में हुए अतिक्रमण और कंक्रीट निर्माण को देखकर यह पीड़ा और गहरी हो जाती है। 

नदी का भविष्य केवल सौंदर्यीकरण परियोजनाओं से सुरक्षित नहीं होगा। इसके लिए  सबसे पहले नदी के मूल पेटे और प्राकृतिक चौड़ाई( सेक्शन ) को पुनः बहाल करना नदी के प्रवाह क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त करना होगा तथा सिवरेज , केमिकल वेस्ट को नदी में जाने से रोकना होगा नदी किनारे बने सीवरेज शोधन संयंत्रों  में उपचारित जल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप होने पर ही उसे नदी में छोड़ा जाना चाहिए नदी के बाढ़ क्षेत्र, फ्लड प्लेन  की वैज्ञानिक सीमा तय कर उसे किसी भी प्रकार के कॉन्क्रीट निर्माण से मुक्त रखा जाना चाहिए।

 हम नदी को केवल एक “प्रोजेक्ट” या “रिवरफ्रंट” के रूप में न देखें, बल्कि एक जीवित पारिस्थितिक तंत्र के रूप में समझें।


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