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उदयपुर में 137 वी कानजी स्वामी जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा, गूंजे आध्यात्मिक जयघोष

उदयपुर, 21 अप्रैल। दिगम्बर जैन समाज के महान धर्मगुरु कानजी स्वामी की जन्म जयंती को “उपकार दिवस” के रूप में शहर में श्रद्धा और उत्साह के साथ ...



उदयपुर, 21 अप्रैल। दिगम्बर जैन समाज के महान धर्मगुरु कानजी स्वामी की जन्म जयंती को “उपकार दिवस” के रूप में शहर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री दिगम्बर जैन मुमुक्षु मंडल एवं श्री दिगम्बर जैन चंद्रप्रभ चैत्यालय के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया।

मंडल के मंत्री अभय बंडी के अनुसार, प्रातः 8 बजे चंद्रप्रभ चैत्यालय से शोभायात्रा प्रारंभ हुई। यह यात्रा मार्शल चौराहा, धानमंडी, मोचीवाड़ा और सिंधी बाजार जैसे प्रमुख मार्गों से होकर गुजरते हुए मुखर्जी चौक स्थित मुमुक्षु मंडल जैन मंदिर पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।

शोभायात्रा में बैंड-बाजों की धुन, सजी-धजी बग्गी में विराजित कानजी स्वामी की तस्वीर और उनके जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक झांकियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। महिलाओं और शाश्वत धाम की बालिकाओं ने “पूज्य गुरुदेव ने क्या दिया—भगवान आत्मा दिखा दिया” जैसे गगनभेदी नारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

शोभायात्रा के पश्चात मुंबई से पधारे पंडित विवेक सहज ने अपने प्रवचन में कानजी स्वामी के जीवन, उनके सिद्धांतों और जैन दर्शन को सरल भाषा में समझाने की उनकी अद्भुत शैली पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कानजी स्वामी ने आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने और मोक्ष मार्ग को अपनाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।

शोभायात्रा में अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान गौरव डॉ जिनेंद्र शास्त्री,नेमीनगर से डॉ. महावीर प्रसाद जैन,निर्मल अखावत,केशवनगर पण्डित ऋषभ शास्त्री,

मुमुक्षु मण्डल से नितीन गंगावत, सुभाष गदीया, हितेश कोठारी, सिमन्धर जी गदिया , सुरेश भोरावत,मनीष दामावत,मनोहर भोरावत,भरत एम.संगावत, सेक्टर 11 से कचरू लाल मेहता, पण्डित खेमचंद शास्त्री, डॉ निलेश शास्त्री जसवंत जी दोशी, नृपेंद्र  भदावत, गयरियावास जैन मंदिर से हितेश गांधी,राकेश दोशी, भव्य शास्त्री, शाश्वत धाम से पण्डित तपीश शास्त्री, नरेंद्र दलावत,भावेश कालिका,त्रिकालवर्ती जिनालय से आशा पंड्या, दीपिका जी, नरेश शाह, ललित गदिया आदि मौजूद थे

कौन थे कानजी स्वामी

भारत देश के गुजरात प्रान्त के सौराष्ट्र क्षेत्र में दो महान  पुरुषों ने जन्म लिया। एक का नाम था महात्मा गांधी तो दूसरे का नाम था श्री कानजी स्वामी l गांधीजी ने जन-जन को अंग्रेजों की पराधीनता से आजादी दिलाई तो श्रीकानजी स्वामी ने जन-जन को अपने अज्ञान से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कियाl पं. श्री ऋषभ शास्त्री ने बताया कि श्री कानजी स्वामी का जन्म वैशाक शुक्ल द्वितीया 1889 को सौराष्ट्र के काठियावाड़ में उमराला नाम के छोटे - से गाँव में पिता मोतीचंद के घर पर  पर माँ उजमबा के गर्भ से हुआ था। श्री शास्त्री ने बताया कि, २०वीं शताब्दी में श्री कानजी स्वामी ने भगवान महावीर के सिद्धान्तों का उद्‌घाटन कर जन जन तक पहुंचाया । श्री कानजी स्वामी का कहना था कि प्राणी मात्र में परमेश्वर बनने की सत्ता विद्यमान है, यदि पुरुषार्थ करें तो प्राणी मात्र परमेश्वर बन सकता है उनका प्रसिद्ध सिद्धांत वाक्य था कि मैं परमात्मा हूं ऐसा नक्की करl हिंदी पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल को उनके जन्मदिन को उपकार दिवस के रूप में मनाया जाता है l

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