भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मानसिक स्वास्थ्य का गहन विश्लेषण से निष्कर्ष कि अनाथ एवं गैर-अनाथ के मानसिक स्वास्थ्य और भावात्मक बुद्धि में विशे...
भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मानसिक स्वास्थ्य का गहन विश्लेषण से निष्कर्ष कि अनाथ एवं गैर-अनाथ के मानसिक स्वास्थ्य और भावात्मक बुद्धि में विशेष रूप से कोई अंतर नहीं पाया गया
उदयपुर। जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ (डिम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), उदयपुर से नेहा मांडावत दवे ने मनोविज्ञान विषय में पी.एच.डी. की उपाधि अर्जित कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे उदयपुर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।
नेहा मांडावत दवे ने अपना शोध कार्य डॉ. कीर्ति दशोरा के कुशल मार्गदर्शन में पूर्ण किया। उनका शोध विषय “A Comparative Study of Emotional Intelligence and Mental Health of Orphans and Non-Orphans” रहा, जिसमें समाज के दो महत्वपूर्ण वर्गों—अनाथ एवं गैर-अनाथ व्यक्तियों—के भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मानसिक स्वास्थ्य का गहन विश्लेषण किया गया।
शोध में यह पाया गया कि पारिवारिक वातावरण, सामाजिक सहयोग एवं भावनात्मक समर्थन का मानसिक स्वास्थ्य और इमोशनल इंटेलिजेंस पर विशेष प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन भविष्य में मनोवैज्ञानिक परामर्श, सामाजिक कल्याण योजनाओं एवं शिक्षा क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्हें विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर शिक्षकों एवं सहपाठियों ने भी उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
परिवारजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि नेहा की यह उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कठिन परिश्रम, लगन एवं समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।
इस उपलब्धि पर समस्त परिवार एवं विश्वविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. नेहा मांडावत दवे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। उनके इस योगदान से समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।

No comments