फोल्डर डायरेक्टरी एवं जल बचाओ पोस्टर का विमोचन उदयपुर 26 अप्रैल- जैन सोशल ग्रुप, लोटस उदयपुर के तत्वाधान में सदस्यों के लिए सपरिवार स्नेह ...
फोल्डर डायरेक्टरी एवं जल बचाओ पोस्टर का विमोचन
उदयपुर 26 अप्रैल- जैन सोशल ग्रुप, लोटस उदयपुर के तत्वाधान में सदस्यों के लिए सपरिवार स्नेह मिलन का आयोजन कार्यक्रम चित्रकूट नगर स्थित जैन संस्थान मादेरिया सभागार में सम्पन्न हुआ।
सभी अतिथियों का स्वागत ग्रुप के अध्यक्ष इंजीनियर सी.पी.जैन ने करते हुए कार्यक्रम की रुपरेखा बताते हुए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि भाजपा आपदा राहत विभाग राजस्थान के प्रदेश संयोजक राजस्थान गौरव डॉ जिनेन्द्र शास्त्री थे। अध्यक्षता जैन सोशल ग्रुप मेवाड़ रीजन के चेयरमेन डॉ अरुण मंडोत ने की। सभी मेहमानों, सदस्यों का अभिनंदन माला, ऊपरना, स्मृति चिन्ह से संस्थापक अध्यक्ष राजमल कोठारी, सचिव आर के नलवाया द्वारा किया गया।
मंचासीन अतिथियों द्वारा फोल्डर डायरेक्टरी एवं जल बचाओ पोस्टर का विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. शास्त्री ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक संबोधन में वर्तमान समय में संस्कारों के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के बदलते परिवेश में बच्चों और युवाओं को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है, और यह जिम्मेदारी सबसे पहले परिवार के बड़ों की होती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि यदि घर का वातावरण सकारात्मक, अनुशासित और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण होगा, तो आने वाली पीढ़ी स्वतः ही उन मूल्यों को आत्मसात करेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अरुण मंडोत ने जैन सोशल ग्रुप लोटस उदयपुर के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह ग्रुप न केवल सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय है, बल्कि मेडिकल और आर्थिक क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मेवाड़ रीजन में ग्रुप की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार के संगठन समाज को एकजुट करने और जरूरतमंदों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में सिंफनी के सितारे कलाकार ऋषि राज, अजयसिंह, नयेनश दवे, कमलेश कुमावत, वीनू, रश्मि कौर ने अपनी मधुर एवं सुरमयी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक गीतों और ग़ज़लों की प्रस्तुति देकर उपस्थित सदस्यों और अतिथियों को भाव-विभोर कर दिया। कभी सुरीले रोमांटिक गीतों ने माहौल को कोमल बना दिया, तो कभी ग़ज़लों की गहराई ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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