तकनीक से मिली मरीजों को राहत; अब गले पर नहीं रहेगा ऑपरेशन का कोई निशान उदयपुर, 29 अप्रैल। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के अधीन संचा...
तकनीक से मिली मरीजों को राहत; अब गले पर नहीं रहेगा ऑपरेशन का कोई निशानउदयपुर, 29 अप्रैल। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के अधीन संचालित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के नाक, कान एवं गला विभाग ने दक्षिण राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। विभाग के विशेषज्ञों ने क्षेत्र में पहली बार बिना किसी बाहरी चीरे के मुंह के रास्ते थॉयराइड ग्रंथि का सफल ऑपरेशन करने में गौरवपूर्ण सफलता हासिल की है।
क्या है आधुनिक तकनीक?
विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत माथुर ने बताया कि इस अत्याधुनिक प्रक्रिया को ट्रांसोरल इंडोस्कॉपिक थाइराइडेक्टॉमी वेस्टीबुलर अप्रोच कहा जाता है। इस तकनीक में मरीज के निचले होंठ के अंदरूनी हिस्से से एंडोस्कोप/दूरबीन और सर्जिकल उपकरणों को गले तक पहुँचाया जाता है। एंडोस्कोप की मदद से स्क्रीन पर देखते हुए थॉयराइड ग्रंथि को मुंह के रास्ते ही बाहर निकाल लिया जाता है।
मरीजों के लिए वरदानः कॉस्मेसिस और कम दर्द
परंपरागत सर्जरी में गले पर एक बड़ा चीरा लगाना पड़ता था, जिसका निशान ताउम्र बना रहता था।
अत्याधुनिक तकनीक से शरीर के बाहरी हिस्से पर कोई चीरा नहीं लगता, जिससे कॉस्मेसिस (सौंदर्य) बना रहता है। यह एक आधुनिक, स्कारलेस (बिना निशान वाली) थायराइड सर्जरी तकनीक है। इसमें गले पर चीरा लगाने के बजाय,एंडोस्कोप (एक छोटा कैमरा) का उपयोग करके थायराइड ग्रंथि को निकाला जाता है। ऑपरेशन में अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक डिवाइस का प्रयोग किया गया, जिससे खून बहुत कम बहता है। मरीज को दर्द कम होता है और वह जल्द स्वस्थ होकर घर जा सकता है।
प्रधानाचार्य डॉ. राहुल जैन का कहना
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने पूरी टीम को सराहा और कहा कि दक्षिण राजस्थान में पहली बार इस जटिल तकनीक का सफल प्रयोग हमारे चिकित्सकों की विश्वस्तरीय विशेषज्ञता को दर्शाता है। आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य हमेशा से ही मरीजों को न्यूनतम चीर-फाड़ वाली सर्जरी की उन्नत तकनीकें उपलब्ध कराना रहा है। ई.एन.टी. विभाग द्वारा किए गए ये तीन सफल ऑपरेशन यह साबित करते हैं कि अब सरकारी अस्पतालों में भी ऐसी आधुनिक सुविधाएं पूरी तरह सुलभ हैं, जिनके लिए पहले मरीजों को महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था।
लगातार मिल रही सफलता
ई.एन.टी. विभाग द्वारा अब तक ऐसे तीन सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। पहला ऑपरेशन अक्टूबर 2025 में किया गया था। हाल ही में 18 अप्रैल को 50 वर्षीय महिला का तीसरा सफल ऑपरेशन किया गया, जो अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में ई.एन.टी. विभाग के डॉ. नवनीत माथुर, डॉ. सिद्धार्थ शाह, डॉ. प्रिया एवं डॉ. भरत शामिल थे। एनेस्थेसिया विभाग से डॉ. ललित रैगर एवं डॉ. हेमराज का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नर्सिंग ऑफिसर ललिता माली, जयंती एवं पल्लवी की सराहनीय सेवा से यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
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