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सावधान क्रिकेट प्रेमी - IPL टिकटों के नाम पर हो सकती है साइबर ठगी: राजस्थान पुलिस की विशेष एडवाईजरी

जयपुर, 20 अप्रैल। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा द्वारा अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वी के सिंह के निर्देशों की पालना मेंआईपीए...

जयपुर, 20 अप्रैल। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा द्वारा अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वी के सिंह के निर्देशों की पालना मेंआईपीएल टिकटों के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए आमजन के लिए विशेष एडवाईजरी जारी की गई है। वर्तमान में आईपीएल 2026 सीजन के दौरान टिकटों की भारी मांग का फायदा उठाकर साइबर अपराधी क्रिकेट प्रेमियों को अपना शिकार बना रहे हैं। 

पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह ने आमजन को सचेत करते हुए बताया कि अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।

साइबर अपराधियों के ठगने के तरीके 

 ■  फिशिंग और क्लोन वेबसाइट्स: अपराधी असली वेबसाइट (जैसे BookMyShow) की नकल करते हैं। इनमें अंतर सिर्फ एक अक्षर का होता है (जैसे: bookmyshoww.com या ipl-tickets-2026.in)। यहाँ कार्ड डिटेल डालते ही आपका खाता खाली हो सकता है।

 ■  सर्च इंजन विज्ञापन (SEO Fraud): गूगल पर "Buy IPL Tickets" सर्च करने पर सबसे ऊपर दिखने वाले विज्ञापन कई बार फर्जी वेबसाइटों के होते हैं। स्कैमर्स पैसे देकर अपने फर्जी लिंक को टॉप पर रैंक करवाते हैं।

 ■  सोशल मीडिया के लुभावने ऑफर: इंस्टाग्राम, फेसबुक और टेलीग्राम पर "वीआईपी पैसेज" या "कन्फर्म्ड टिकट" के नाम पर फर्जी विज्ञापन चलाए जाते हैं।

 ■   नकली QR कोड का जाल: भुगतान के बाद अपराधी व्हाट्सएप पर फर्जी क्यूआर कोड या ई-टिकट भेजते हैं, जो वास्तव में स्टेडियम के गेट पर स्कैन नहीं होते।

 ■   इमरजेंसी का झांसा: "सिर्फ 2 टिकट बचे हैं" या "डिस्काउंट ऑफर" कहकर अपराधी तुरंत पेमेंट करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं।

बचाव के उपाय

 1.  टिकट हमेशा केवल आईपीएल की आधिकारिक वेबसाइट www.iplt20.com या अधिकृत पार्टनर (जैसे www.insider.in,BookMyShow से ही खरीदें।

 2.  भुगतान से पहले वेबसाइट की स्पेलिंग और https:// (सुरक्षित लॉक आइकन) की जांच अवश्य करें।

 3. हमेशा सुरक्षित पेमेंट गेटवे का उपयोग करें। क्रेडिट कार्ड का उपयोग बेहतर है क्योंकि इसमें 'फ्रॉड प्रोटेक्शन' की सुविधा होती है।

 4. यदि कोई डील "हकीकत से परे" (Too good to be true) लगे या बहुत सस्ती मिले, तो समझ लें कि वह धोखाधड़ी है।

 साइबर ठगी होने पर क्या करें? 

यदि आप किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना समय गंवाए इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930/9257510100,ऑनलाइन पोर्टल https://cybercrime.gov.in या निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन पर दे।

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