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₹15 हजार करोड़ सड़कों पर खर्च होंगे तो हर रुपये की गुणवत्ता जमीन पर दिखनी चाहिए, बारिश में बहने वाली सड़कें अब स्वीकार नहीं — सोलंकी

प्रदेश भर में थर्ड पार्टी टेक्निकल ऑडिट की मांग; RTPP Rule 75A की सख्ती से पालना, रोड वर्क सिक्योरिटी न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा कम से कम पांच व...

प्रदेश भर में थर्ड पार्टी टेक्निकल ऑडिट की मांग; RTPP Rule 75A की सख्ती से पालना, रोड वर्क सिक्योरिटी न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा कम से कम पांच वर्ष का Defect Liability Period (DLP) लागू करने की मांग

उदयपुर। राजस्थान में मानसून के दौरान प्रदेश के अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, जिला एवं ग्रामीण सड़कों पर गड्ढों, धंसाव, किनारों के टूटने, जलभराव तथा हाल ही में निर्मित अथवा मरम्मत की गई सड़कों के कम समय में क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर नई सड़कें पहली ही बारिश में उखड़ती दिखाई दीं, जिससे आमजन को आवागमन में भारी परेशानी, दुर्घटनाओं का खतरा तथा सरकारी धन के प्रभावी उपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। इसी बीच वर्ष 2026-27 में राजस्थान सरकार द्वारा सड़क निर्माण एवं आधारभूत संरचना पर लगभग ₹15 हजार करोड़ व्यय किए जाने की घोषणा को देखते हुए भाजपा उदयपुर देहात के पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त सिविल इंजीनियर इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने राज्य सरकार से प्रदेशभर में नवनिर्मित, सुदृढ़ीकृत तथा हाल में मरम्मत की गई सड़कों का स्वतंत्र Third-Party Technical & Quality Audit कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब केवल बजट खर्च कर देना विकास का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि जनता को मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकालीन सड़कें मिलनी चाहिए।

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा, "₹15 हजार करोड़ का बजट है तो ₹15 हजार करोड़ की गुणवत्ता और जवाबदेही भी राजस्थान की सड़कों पर दिखाई देनी चाहिए। जनता बजट के आंकड़े नहीं, मजबूत और टिकाऊ सड़कें चाहती है।" उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये की सड़क निर्धारित अवधि से पहले टूटती है तो केवल गड्ढे भरकर मामला समाप्त नहीं होना चाहिए, बल्कि उस सड़क का तकनीकी पोस्टमार्टम होना चाहिए और रिकॉर्ड पर स्पष्ट होना चाहिए कि सड़क किसने बनाई, किसने नापी, किसने गुणवत्ता प्रमाणित की तथा किसकी अनुशंसा पर भुगतान हुआ। उनके अनुसार सड़क की गुणवत्ता केवल ऊपर की काली सतह देखकर प्रमाणित नहीं की जा सकती। स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट में Subgrade Compaction, GSB, WMM, DBM एवं अन्य Bituminous Layers की वास्तविक मोटाई, Aggregate Gradation, Field Density, Bitumen Content, Core Cutting Test, Camber, Cross Fall, Shoulder तथा Drainage System की वैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए। रैंडम स्थानों से Core Samples लेकर स्वतंत्र एवं मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जाए तथा स्वीकृत Design, BOQ एवं तकनीकी स्पेसिफिकेशन के अनुरूप वास्तविक निर्माण का मिलान किया जाए। उन्होंने कहा, "सड़क ऊपर से चमकदार दिखे और अंदर निर्धारित मोटाई, कम्पेक्शन या सामग्री ही न हो तो वह विकास नहीं, जनता के धन के साथ समझौता है।"

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि Rajasthan Transparency in Public Procurement Rules, 2013 के Rule 75A में अत्यधिक कम दर वाली Unbalanced Bids के विरुद्ध स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था है, किंतु अनेक मामलों में इसकी प्रभावी पालना सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की कि अनुमानित निविदा मूल्य से अत्यधिक नीचे प्राप्त निविदाओं में नियमों के अनुसार Additional Performance Security की कठोर गणना एवं वसूली की जाए और इसमें किसी प्रकार की अनुचित छूट या शिथिलता न दी जाए। उन्होंने कहा, "जब कोई ठेकेदार विभाग की अनुमानित लागत से अत्यधिक कम दर पर कार्य लेने को तैयार है तो सरकार को यह प्रश्न अवश्य पूछना चाहिए कि वह निर्धारित गुणवत्ता, सामग्री, मजदूरी और तकनीकी मानकों को बनाए रखते हुए काम पूरा कैसे करेगा?" उन्होंने कहा कि Below-BSR अथवा अत्यधिक कम दर पर ठेका हासिल करना प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन उसकी भरपाई सड़क की मोटाई, बिटुमिन, सामग्री अथवा गुणवत्ता कम करके नहीं की जा सकती। इसी प्रकार उन्होंने रोड वर्क में वर्तमान में लगभग 3 प्रतिशत की गई Performance/Security व्यवस्था की समीक्षा कर इसे न्यूनतम 10 प्रतिशत किए जाने की मांग की ताकि सार्वजनिक धन की सुरक्षा मजबूत हो सके। साथ ही सभी महत्वपूर्ण सड़क निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों में कम से कम पांच वर्ष का Defect Liability Period (DLP) अनिवार्य किया जाए और इस अवधि में गड्ढे, धंसाव, सतह उखड़ने, किनारे टूटने अथवा निर्माण गुणवत्ता से संबंधित किसी भी दोष की मरम्मत संबंधित ठेकेदार से उसके स्वयं के खर्च पर कराई जाए। उन्होंने कहा, "जनता एक सड़क बनाने के लिए पैसा दे और दो-तीन वर्ष बाद उसी सड़क की मरम्मत के लिए फिर सरकारी खजाना खोला जाए—यह व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए।"

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने स्पष्ट कहा कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता के लिए केवल ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराकर विभागीय जवाबदेही समाप्त नहीं की जा सकती। साइट पर कार्य की निगरानी, सामग्री की जांच, प्रत्येक लेयर की मोटाई, कम्पेक्शन, माप पुस्तिका, टेस्ट रिपोर्ट, गुणवत्ता प्रमाणन तथा भुगतान प्रक्रिया में विभागीय अभियंताओं की स्पष्ट जिम्मेदारी होती है। यदि थर्ड पार्टी ऑडिट में सड़क की मोटाई कम मिले, बिटुमिन निर्धारित मात्रा से कम मिले, कम्पेक्शन फेल हो अथवा घटिया सामग्री मिले तो संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ कार्य को नापने, पास करने तथा गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले जिम्मेदार अभियंताओं के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। गंभीर मामलों में सरकारी नुकसान की वसूली, सुरक्षा राशि एवं Additional Performance Security जब्त करने, बैंक गारंटी भुनाने तथा नियमानुसार ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बड़े सड़क एवं भवन निर्माण कार्यों का Digital Quality Record तैयार करने की भी मांग की, जिसमें स्वीकृत लागत, ठेकेदार का नाम, जिम्मेदार अभियंताओं का विवरण, स्वीकृत Design, BOQ, Layer-wise Test Reports, Geo-tagged Photos, Videos तथा Laboratory Reports सुरक्षित रखी जाएं। उन्होंने कहा कि जनता के धन से बनी सड़क खराब होती है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसे किसने बनाया, किसने नापा, किसने पास किया और किसकी अनुशंसा पर भुगतान हुआ।

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने घोषणा की कि राजस्थान के समर्पित, ईमानदार, निष्पक्ष एवं राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत सेवानिवृत्त सिविल इंजीनियरों को एक मंच पर लाकर प्रदेशव्यापी  "निर्माण गुणवत्ता प्रहरी"  संगठन बनाने की पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि दशकों तक सड़क, भवन, पुल, सिंचाई एवं अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर कार्य कर चुके सेवानिवृत्त अभियंताओं के अनुभव का उपयोग अब राजस्थान में गुणवत्तापूर्ण निर्माण को बढ़ावा देने और जनहित में तकनीकी जागरूकता विकसित करने के लिए किया जाएगा। यह संगठन किसी सरकार, विभाग, अधिकारी अथवा ठेकेदार का अनावश्यक विरोध नहीं करेगा, बल्कि केवल तकनीकी तथ्यों, परीक्षणों तथा मानकों के आधार पर कार्य करेगा और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि जनता के धन से बनने वाली सड़कें एवं सरकारी भवन IS Codes, Indian Roads Congress (IRC) Codes, MoRTH Specifications, National Building Code तथा संबंधित विभागीय तकनीकी मानकों के अनुरूप निर्मित हों। प्रत्येक जिले में अनुभवी सेवानिवृत्त Chief Engineers, Additional Chief Engineers, Superintending Engineers, Executive Engineers, Assistant Engineers, Junior Engineers तथा अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बनाने का प्रयास किया जाएगा, जो जनशिकायतों एवं उपलब्ध तकनीकी तथ्यों के आधार पर संदिग्ध गुणवत्ता वाले निर्माण कार्यों का प्रारंभिक तकनीकी अवलोकन कर सके तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र Laboratory Testing, Core Cutting एवं Third-Party Technical Audit की मांग करे। उन्होंने कहा, "निर्माण गुणवत्ता भी राष्ट्र निर्माण है। घटिया निर्माण केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि राष्ट्र के संसाधनों की बर्बादी है। राजस्थान के अनुभवी, ईमानदार और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित सेवानिवृत्त सिविल इंजीनियर अपने ज्ञान और अनुभव को प्रदेशहित में समर्पित करने के लिए एक मंच पर आएंगे।"

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से प्रदेश में "राजस्थान रोड एंड बिल्डिंग क्वालिटी ऑडिट मिशन" तत्काल प्रारंभ करने की मांग करते हुए सुझाव दिया कि IIT, MNIT, सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों तथा स्वतंत्र मान्यता प्राप्त तकनीकी एजेंसियों का पैनल बनाकर सड़क एवं महत्वपूर्ण भवन निर्माण कार्यों का नियमित रैंडम थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि ₹15 हजार करोड़ का सड़क बजट केवल खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि राजस्थान को मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ सड़कें देने के लिए है। सड़क समय से पहले टूटे तो अब केवल गड्ढे पर पैच नहीं, जिम्मेदारी पर प्रहार होना चाहिए। सरकार बजट दे रही है तो ठेकेदार गुणवत्ता दे और इंजीनियर जवाबदेही निभाए। हमारा संकल्प स्पष्ट है कि राजस्थान में जनता के धन से बनने वाली प्रत्येक सड़क और सरकारी इमारत निर्धारित IS Code, IRC, MoRTH तथा अन्य तकनीकी मानकों से नीचे नहीं बननी चाहिए तथा निर्माण में एक इंच कम मोटाई और एक रुपये की घटिया गुणवत्ता भी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, भाजपा उदयपुर देहात इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग की प्रभारी श्रीमती दिया कुमारी को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर राजस्थान सरकार से "राजस्थान रोड एंड बिल्डिंग क्वालिटी ऑडिट मिशन" को तत्काल प्रारंभ करने, प्रदेशभर में स्वतंत्र थर्ड पार्टी तकनीकी एवं गुणवत्ता ऑडिट व्यवस्था लागू करने, RTPP Rule 75A का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, रोड वर्क की सिक्योरिटी न्यूनतम 10 प्रतिशत करने, पांच वर्ष का अनिवार्य DLP लागू करने तथा निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है।


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