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रजत रथ पर सवार होकर व राजशी वेशभूषा धारण कर प्रभु जगन्नाथ स्वामी शाही लवाजमे के साथ आज निकलेंगे नगर भ्रमण पर

उदयपुर, 15 जुलाई। भगवान जगन्नाथ स्वामी, माता लक्ष्मी और दाणी राय जी के साथ 90 किलो चांदी के बने रथ जो कि 16 फीट लंबा, 8 फीट चौड़ा और 21 फीट ऊ...


उदयपुर, 15 जुलाई। भगवान जगन्नाथ स्वामी, माता लक्ष्मी और दाणी राय जी के साथ 90 किलो चांदी के बने रथ जो कि 16 फीट लंबा, 8 फीट चौड़ा और 21 फीट ऊंचा है उस पर राजशी वेशभूषा, हीरे जवाहरात, माणक, मोती से जड़ा कंठला, मुकुट, सोने के कंगन, ढाल, तलवार आदि धारण कर नगर में भक्तों को दर्शन देने दोपहर 4.00 बजे शाही लवाजमें के साथ निकलेंगे। महिलाएं सिर पर कलश लिए गीत गाती हुई, वहीं चांदी के रथ के आगे पहली बार 375 वर्ष पुराना ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को जिस पर जुगल जोड़ी सरकार राधा कृष्ण विराजित होकर नगर में भ्रमण पर निकलेंगे। 

रथ यात्रा समिति के प्रवक्ता राजेंद्र सेन ने बताया कि 16 जुलाई आषाढी बीज, गुरुवार को जिलों के शहर उदयपुर में भगवान जगन्नाथ स्वामी की विशाल रथ यात्रा जगदीश मंदिर, जगदीश चौक प्रांगण से दोपहर 4 बजे प्रभु की पूजा अर्चना, भोग, आरती के पश्चात राज परिवार की ओर से लाई गई राजशी पोशाक भगवान जगन्नाथ स्वामी को धारण करा कर, प्रभु नगर में भक्तों को दर्शन देने चांदी के रथ पर सवार होकर  भ्रमण पर निकलेंगे। 

प्रभु की रथ यात्रा में शामिल भक्तों के लिए विभिन्न व्यंजनों,  पेय पदार्थ की सेवा के लिए पलक पावड़े  बिछाए श्रद्धालु इंतजार कर रहे हैं। प्रभु जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा के आगे बैंड बाजे, विभिन्न समाज और संगठनों की भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की मनमोहक झांकियां,, 21 घोड़े, भजन मंडलीया, सगस  जी,कल्लाजी एवं अन्य मठो  के गादी पतियों का संघ अपने अनुयायियों के साथ चलेंगे। भक्तों का अपार जनसमूह भगवान जगन्नाथ स्वामी की जय जयकार करता हुआ नाचता, गाता, पारंपरिक वेशभूषा   पहने हुए चलेगा. भक्तों के  पीछे 21 सदस्यों का शाही  लावाजमा चलेगा। उसके पीछे 1100 महिलाएं कलश लिए हुए चलेगी। उनके पीछे लकड़ी का हाथी एवं उसके पीछे 375 वर्ष पुराना लकड़ी के घोड़े से तैयार लकड़ी से बना रथ, 8 फीट लंबा, 3, फीट चौड़ा और 8 फीट ऊंचा रथ जिस पर चांदी की रामरवाड़ी में विराजे जुगल जोड़ी सरकार, राधा कृष्ण चलेंगे। लकड़ी के रथ के पीछे 90 किलोग्राम चांदी से बना रथ  जिसकी लंबाई 16 फीट,चौड़ाई 8 फीट और ऊंचाई 21 फिट है, उस पर प्रभु जगन्नाथ स्वामी, माता लक्ष्मी एवं दानीराय जी के साथ राजसी पोशाक, हीरे जवाहरात, माणक, मोती,पन्ना से जड़ित हार, मुकुट, सोने के कडे, ढाल, तलवार आदि धारण कर एक मनमोहक और आकर्षक रूप में भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। रथ के पीछे राम दरबार की सवारी निकलेगी। 

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा समिति के संयोजक दिनेश मकवाना ने बताया कि भगवान की रथ यात्रा के दिन सरकारी कार्यालय में दोपहर के बाद आधे दिन का अवकाश रहेगा। सभी भक्तों से अपील भी की गई है कि कीमती जेवर,चौन,घड़ी मोबाइल आदि साथ लेकर ना आए। 

रथ यात्रा में शामिल 10000 भक्तों के लिए जगन्नाथ अन्ना क्षेत्र समिति की ओर से आसींद की हवेली पार्किंग में भोजन प्रसादी भी रखी गई है। रथ  समिति के अध्यक्ष राजेंद्र श्रीमाली ने बताया कि समिति के 51 सदस्यों की टीम प्रभु के रथ को पारंपरिक वेशभूषा धोती, कुर्ता, कुर्ता पजामा, मेवाड़ी पगड़ी धारण कर नंगे पैर रथ को खींचते हुए चलेंगे। 

मंदिर के पुजारी परिषद के हेमेंद्र पुजारी ने बताया की पहली बार मंदिर परिसर में चारों देवरिया में विराजित स्वरूपों को रथ यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण देने हेतु ठाकुर जी मंदिर परिसर में 375 वर्ष पुराने रन सवार होकर निकलते हैं वही लकड़ी का रथ प्रभु जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा का एक आकर्षण एवं श्रद्धा का प्रतीक होगा इस। रथ में जुगल जोड़ी सरकार राधा कृष्ण विराजेंगे। भक्तों को दर्शन देंगे। प्रभु जगन्नाथ स्वामी जिस चांदी के रथ पर सवार होकर नगर में भ्रमण पर निकलेंगे उस रथ की फिटिंग, पोलिश, सफाई और रंग रोगन करने में आर्टिस्ट कैलाश जिनगर  और चौहान हैंडीक्राफ्ट के सदस्यों की टीम का सहयोग सराहनीय रहा.

रथ यात्रा रवाना होने से पूर्व दोपहर 2 बजे मंदिर परिसर में लकड़ी के रथ पर जुगल जोड़ी सरकार और लड्डू गोपाल विराजित होकर मंदिर परिषद की देवरिया में विराजित स्वरूपों को रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लावा  लश्कर,भजन मंडली के कलाकारों द्वारा गए भजनों से आमंत्रित किया जाएगा। इस दौरान लकड़ी के रथ में तैयार घोड़े को भी दाल का भोग लगाया जाएगा। 


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