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जनगणना 2027 में जाति का नया अध्याय, सिंधी समाज के लिए पहचान और मंथन का अवसर

उदयपुर। जनगणना केवल  आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि किसी समाज की सामाजिक पहचान, वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा को समझने का महत्...


उदयपुर। जनगणना केवल  आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि किसी समाज की सामाजिक पहचान, वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा को समझने का महत्वपूर्ण आधार होती है। वर्ष 2027 की जनगणना में जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने का निर्णय सिंधी हिंदू समाज के लिए भी अपनी सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर गंभीरता से विचार करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना के लिए 40 प्रश्नों वाली प्रश्नावली अधिसूचित की है। इसमें सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े विभिन्न प्रश्न शामिल हैं। जाति, धर्म, मातृभाषा, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, दिव्यांगता सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

पूर्व राज्य मंत्री एवं राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी ने कहा कि जनगणना-2027 को सिंधी समाज को केवल सरकारी प्रक्रिया के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे अपनी पहचान और सामाजिक स्थिति को सही रूप में दर्ज कराने के अवसर के रूप में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक परिवार को जनगणना में मांगी जाने वाली जानकारी पूरी जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ उपलब्ध करानी चाहिए।

मातृभाषा के कॉलम में ‘सिंधी’ दर्ज कराना समाज की जिम्मेदारी

सिंधी समाज के लिए जनगणना का एक महत्वपूर्ण पक्ष मातृभाषा से जुड़ा है। प्रश्नावली में मातृभाषा तथा अन्य ज्ञात भाषाओं के संबंध में जानकारी ली जाएगी। ऐसे में प्रत्येक सिंधी परिवार के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए कि यदि उसकी मातृभाषा सिंधी है, तो वह अपनी मातृभाषा के रूप में ‘सिंधी’ का स्पष्ट उल्लेख करे।

हरीश राजानी ने कहा कि “भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह हमारी संस्कृति, इतिहास, परंपरा और सामूहिक पहचान की सबसे मजबूत कड़ी होती है। सिंधी समाज ने विभाजन की त्रासदी के बावजूद अपनी भाषा और संस्कृति को जीवित रखा है। आज हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को मजबूती से पहुंचाएं।”

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार की मातृभाषा सिंधी है तो उसे जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में सिंधी का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। इससे सिंधी भाषा की वास्तविक स्थिति और समाज की भाषाई पहचान का प्रमाणिक आंकड़ा सामने आने में मदद मिलेगी।

जाति को लेकर व्यापक विमर्श जरूरी

जनगणना-2027 में जाति संबंधी जानकारी का शामिल होना स्वतंत्र भारत की जनगणना व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। जाति संबंधी जानकारी दर्ज होने से देश की सामाजिक संरचना और विभिन्न समुदायों की वास्तविक स्थिति को समझने में भविष्य में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

सिंधी हिंदू समाज के लिए भी यह विषय विशेष महत्व रखता है। प्रत्येक परिवार को अपनी पारिवारिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि की सही जानकारी के आधार पर ही विवरण देना चाहिए। यह किसी एक व्यक्ति या संस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंतन और तथ्यात्मक जानकारी का विषय है।

राजानी ने कहा कि सिंधी समाज को इस विषय पर जल्दबाजी या किसी भी प्रकार की अफवाह से बचते हुए पूरी तरह तथ्यात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। समाज के संगठनों, पंचायतों, सामाजिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को मिलकर लोगों को जनगणना की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना चाहिए, ताकि प्रत्येक परिवार सही जानकारी उपलब्ध करा सके।

आरक्षण को लेकर भी रहे स्पष्टता

जाति संबंधी जानकारी जनगणना में दर्ज होने मात्र से किसी व्यक्ति को स्वतः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा अथवा आरक्षण की पात्रता प्राप्त नहीं होती। आरक्षण की पात्रता संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, कानूनों और सक्षम सरकारी प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियमों के आधार पर तय होती है।

इसलिए सिंधी समाज में जाति और आरक्षण को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह के बजाय तथ्यात्मक एवं कानूनी जानकारी का प्रसार किया जाना आवश्यक है। समाज के संगठनों, पंचायतों, सामाजिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को मिलकर इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।

पहचान के साथ भविष्य की चिंता भी जरूरी

जनगणना के आंकड़े आने वाले वर्षों में सरकारी नीतियों, सामाजिक योजनाओं और विकास की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए सिंधी समाज को इस अवसर को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सामाजिक पहचान, भाषा, सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जोड़कर देखना चाहिए।

हरीश राजानी ने कहा कि “हमारे समाज की पहचान केवल हमारे वर्तमान से नहीं, बल्कि हमारे इतिहास और हमारी आने वाली पीढ़ियों से भी जुड़ी है। जनगणना में सही जानकारी दर्ज होगी तो भविष्य में समाज की वास्तविक स्थिति को समझने और उसके अनुरूप योजनाएं बनाने में भी सहायता मिलेगी।”

उन्होंने समाजजनों से अपील करते हुए कहा कि जनगणना के दौरान मांगी गई जानकारी सही, स्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से उपलब्ध कराएं। विशेष रूप से जिन परिवारों की मातृभाषा सिंधी है, वे अपनी मातृभाषा ‘सिंधी’ के रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं।

राजानी ने कहा कि “यह समय भावनाओं से अधिक जागरूकता, तथ्यों और सामाजिक एकजुटता का है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतनी ही मजबूत रहे, जितनी हमारे पूर्वजों ने कठिन परिस्थितियों में इसे बनाए रखा।” उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 सिंधी समाज के लिए अपनी पहचान को आंकड़ों में दर्ज कराने, वर्तमान सामाजिक स्थिति को समझने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सामाजिक विरासत तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।

हरीश राजानी, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान सिंधी अकादमी

पूर्व राज्य मंत्री

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