Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

breaking news

latest

विनय जीवन का आभूषण, बिना झुके कुछ नहीं मिलताःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आध्यात्मिक प्रवचन, परिवार में शांति के लिए अहंकार त्यागने का संदेश उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित ...

वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आध्यात्मिक प्रवचन, परिवार में शांति के लिए अहंकार त्यागने का संदेश

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन में विनय का होना बेहद जरूरी है। विनय के बिना कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वीवीआईपी से मिलने के लिए प्रोटोकॉल होता है, उसी प्रकार मंदिर में प्रवेश का भी एक आध्यात्मिक प्रोटोकॉल होता है। मंदिर में प्रवेश करते ही चौत्यवंदन, द्रव्य पूजा और भाव पूजा के माध्यम से परमात्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रावक को त्रिकाल पूजा के साथ अखंड संयम का भाव रखना चाहिए। गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति सांसारिक जिम्मेदारियां निभाए, लेकिन सांसारिकता में डूबे नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहाज पानी में रहने तक सुरक्षित रहता है, लेकिन उसमें छेद हो जाए और पानी अंदर आने लगे तो उसकी सुरक्षा मुश्किल हो जाती है। इसी प्रकार संसार में रहते हुए भी मोह-माया को अपने भीतर प्रवेश नहीं करने देना चाहिए।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि परमात्मा से मांगना है तो विनय के साथ मांगना चाहिए। बिना झुके कुछ नहीं मिलता। खाली बाल्टी को भी पानी लेने के लिए कुएं में झुकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि झुकना जीवंतता की निशानी है, जबकि अकड़ मुर्दों की पहचान है।
परिवार में अहंकार नहीं, समझौते से आती है शांति
उन्होंने कहा कि शांति का पहला अनुभव व्यक्ति को अपने परिवार में ही होता है। शास्त्रों में भी परिवार में सामंजस्य बनाए रखने के लिए आवश्यक होने पर समझौता करने की बात कही गई है। परिवार में अकड़ और अहंकार के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यदि व्यक्ति घर में भी अपने स्टेटस का लबादा ओढ़कर रहेगा तो परि सच्ची खुशी और शांति कायम नहीं रह सकती।
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने भगवान महावीर के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनसे विनय की प्रेरणा मिलती है। राजकुमार वर्धमान महावीर 28 वर्ष की आयु में अपने बड़े भाई नंदीवर्धन के पास पहुंचे और सबसे पहले झुककर उनका अभिवादन किया। तीन ज्ञान के स्वामी होने के बावजूद उन्होंने बड़े भाई के प्रति विनय भाव रखा और संयम ग्रहण करने की अनुमति मांगी। नंदीवर्धन ने भी उन्हें उठाकर गले लगा लिया। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किए।

No comments