उदयपुर,30 मई। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भीलों का बेदला के शरीर रचना (एनाटॉमी) विभाग की ओर से द्वारा ‘हैंड्स-ऑन प्लास्टिनेशन वर्कशॉप‘...
उदयपुर,30 मई। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भीलों का बेदला के शरीर रचना (एनाटॉमी) विभाग की ओर से द्वारा ‘हैंड्स-ऑन प्लास्टिनेशन वर्कशॉप‘ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्घाटन ट्रावणकोर मेडिकल कॉलेज,कोल्लम (केरल) से आए हरिकृष्णन पी.आर.एमजीएम मेडिकल कॉलेज मुम्बई से डॉ.मिनी मोल पी,पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. यू. एस. परिहार, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला अध्यक्ष डॉ.हिना शर्मा,सहायक आचार्य एवं कार्यशाला सचिव इशा श्रीवास्तव,बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.नीता साही तथा फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. वनोदिनी वारहडे द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।
पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने इस कार्यशाला के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा हमारा उद्देश्य है कि पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करे, बल्कि देशभर के मेडिकल विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित भी करे। मैं इस कार्यशाला की सफलता के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देता हूं।
इस अवसर पर पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ.यू. एस. परिहार ने कहा कि इस तरह की प्रायोगिक कार्यशालाएं विद्यार्थियों और फैकल्टी के लिए ज्ञानवर्धन का अमूल्य माध्यम होती हैं। प्लास्टिनेशन जैसी तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला के पहले दिन हरिकृष्णन पी.आर. ने प्लास्टिनेशन की अवधारणा और इसके चिकित्सा शिक्षा में उपयोग पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक जैविक नमूनों को स्थायी रूप से संरक्षित करने का वैज्ञानिक तरीका है,जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक संरचना को दीर्घकाल तक अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला अध्यक्ष डॉ.हिना शर्मा ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ल्यूमिनल कास्टिंग, शीट प्लास्टिनेशन तथा प्लास्टिनेशन चेंबर पर कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को उनके द्वारा तैयार किए गए नमूने स्मृति-स्वरूप प्रदान किए जाएंगे। यह कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
इस दौरान कार्यशाला सचिव ईशा श्रीवास्तव,डॉ.सविता गाडेकर,डॉ. मेघना भौमिक,डॉ.अंजलि जैन,डॉ.प्रीतेश मेनारिया,डॉ.भावना श्रीवास्तव, डॉ.आबिद हुसैन और डॉ.कविता धिडारिया आदि उपस्थित रहे।
पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने इस कार्यशाला के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा हमारा उद्देश्य है कि पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करे, बल्कि देशभर के मेडिकल विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित भी करे। मैं इस कार्यशाला की सफलता के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देता हूं।
इस अवसर पर पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ.यू. एस. परिहार ने कहा कि इस तरह की प्रायोगिक कार्यशालाएं विद्यार्थियों और फैकल्टी के लिए ज्ञानवर्धन का अमूल्य माध्यम होती हैं। प्लास्टिनेशन जैसी तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला के पहले दिन हरिकृष्णन पी.आर. ने प्लास्टिनेशन की अवधारणा और इसके चिकित्सा शिक्षा में उपयोग पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक जैविक नमूनों को स्थायी रूप से संरक्षित करने का वैज्ञानिक तरीका है,जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक संरचना को दीर्घकाल तक अध्ययन के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
एनाटॉमी विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला अध्यक्ष डॉ.हिना शर्मा ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ल्यूमिनल कास्टिंग, शीट प्लास्टिनेशन तथा प्लास्टिनेशन चेंबर पर कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। सभी प्रतिभागियों को उनके द्वारा तैयार किए गए नमूने स्मृति-स्वरूप प्रदान किए जाएंगे। यह कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
इस दौरान कार्यशाला सचिव ईशा श्रीवास्तव,डॉ.सविता गाडेकर,डॉ. मेघना भौमिक,डॉ.अंजलि जैन,डॉ.प्रीतेश मेनारिया,डॉ.भावना श्रीवास्तव, डॉ.आबिद हुसैन और डॉ.कविता धिडारिया आदि उपस्थित रहे।

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