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उद्देशिका संविधान का सार विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

संविधान का मूल भाव है मानवता - प्रो. सारंगदेवोत  उदयपुर 12 जून  / राजस्थान विद्यापीठ के संघटक विधि महाविद्यालय की ओर से महाविद्य़ालय के सभाग...


संविधान का मूल भाव है मानवता - प्रो. सारंगदेवोत 

उदयपुर 12 जून  / राजस्थान विद्यापीठ के संघटक विधि महाविद्यालय की ओर से महाविद्य़ालय के सभागार में उद्देशिका संविधान का सार है विषय पर आयोजित  एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजली एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। प्रारंभ में विभागाध्यक्ष प्रो. कला मुणेत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमिनार के उद्देश्यों, उसकी वर्तमान प्रासंगिकता तथा संविधान की उद्देशिका की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।  

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय संविधान की उद्देशिका का मूल भाव मानवता है। एक ऐसी मानवता जिसमें मनुष्य ही नहीं सम्पूर्ण प्राणी जगत के कल्याण की भावना व्याप्त है। भारतीय संविधान की उद्देशिका बेहतर का स्वप्त और सर्वे भवंतु सुखिना का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रस्तावना न्याय, स्वतंत्रता, समता एवं बंधुत्व पर टिकी हुई है। भारत का संविधान केवल राजनीतिक दस्तावेज नहींे है वरन् यह भारतीयता की सामाजिक, संास्कृतिक रचना भी है। हमारा कर्तव्य है कि उद्देशिका के आदर्शो को साकार करने में हर संभव प्रयास करें। संविधान की उद्देशिका श्रीमद् भगतवत गीता के समकक्ष है जिसमें भारत की लोकतंत्र की आत्मा निवास करती है। उन्होंने कहा कि उद्देशिका में “सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य” के सिद्धांत ही भारतीय गणराज्य के संचालन का मूल स्तंभ हैं। भारत का संविधान न केवल देश का सर्वोच्च विधि ग्रंथ है, बल्कि इसकी उद्देशिका राष्ट्र के समग्र आदर्शों की सजीव अभिव्यक्ति है।

विधि का शासन उपलब्ध कराता है संविधान - रतन सिंह राव 

मुख्य वक्ता उदयपुर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता राव रतन सिंह आॅनलाईन जुड़े एवं उन्होंने ने कहा कि संविधान देश में विधि का शासन उपलब्ध कराता है जो हमें न्याय और समता के महान मूल्यांें का साझीदा बनने का अवसर प्रदान करता है। संविधान की उद्देशिका को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए उसके विभिन्न घटकों न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गहराई से व्याख्या की। उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान के प्रति निष्ठा रखने तथा अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन करने हेतु प्रेरित किया। सेमीनार में वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. कृष्ण किशोर त्रिवेदी, डाॅ. प्रतीक जांगीड़, डाॅ. विनीता व्यास, डाॅ. छत्रपाल सिंह, डाॅ. अंजू कावडिया, शबनम तोबवाला, पुष्पा लौहार ने संविधान के विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डाॅ. मीता चैधरी ने किया जबकि आभार डाॅ. सुरेन्द्र सिंह चुंडावत ने जताया। सेमीनार में डीन, डायरेक्टर , विद्यार्थी एवं स्कोलर्स उपस्थित थे।

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