26 करोड़ की एफडी और नियुक्तियों में किया गया फर्जीवाड़ाः एडहॉक कमेटी उदयपुर। उदयपुर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था भूपाल नोबल्स को संचालित करने...
26 करोड़ की एफडी और नियुक्तियों में किया गया फर्जीवाड़ाः एडहॉक कमेटी
उदयपुर। उदयपुर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था भूपाल नोबल्स को संचालित करने वाली विद्या प्रचारिणी सभा के पूर्व कार्यकारिणी और प्रधान सरंक्षक के बीच विवाद और गहरा गया। प्रधान संरक्षक और नाथद्वारा विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़ की ओर से गठित एडहॉक कमेटी ने शनिवार को प्रेस वार्ता में पूर्व कार्यकारिणी के पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि पदाधिकारियों ने फर्जी डिग्री से रिश्तेदारों को नौकरियां दे दीं तो 26 करोड की एफडी को भी जाली साइन से तुड़वाकर रुपए हड़प लिए। एडहॉक कमेटी के चेयरमैन डॉ. युवराजसिंह झाला ने कहा कि घोटाला छिपाने के लिए ऑडिट नहीं होने दी।
झाला ने कई चौकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने कहा कि विद्या प्रचारिणी सभा में 25 सालों से एक गुट का कब्जा रहा। इसने आर्थिक घोटालों को छिपाने के लिए कमी निष्पक्ष ऑडिट होने नहीं दी। साल 2017 और 2022 में ऑडिट की कोशिशें हुई तो सभा के तत्कालीन मंत्री महेंद्रसिंह अगरिया ने उसे रुकवा दिया। इतना ही नहीं 2025 में ऑडिट टीम के साथ अभद्रता की गई। उन्हें ऑफिस में घुसने से रोका गया। पूर्व पदाधिकारियों ने गड़बड़ियों को दबाने के लिए ऑडिटर्स को डराया-धमकाया और जरूरी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराए।
संस्थान के प्रधान संरक्षक का एकमात्र उद्देश्य तंत्र में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग खुद को बचाने के लिए अभद्र भाषा और अनैतिक तरीकों पर उतर आए। हम भी इस लड़ाई में पीछे नहीं
पूर्व पदाधिकारियों ने संस्थान के पैसों को निकलवाया
झाला ने आरोप लगाए कि संस्था के पूर्व पदाधिकारियों ने जाली हस्ताक्षरों के जरिए मारी-भरकम राशि को बैंक से निकलवाया। यूनिवर्सिटी की चेकबुक पर रजिस्ट्रार या सीएफओ की जगह उन लोगों ने साइन किए जिनके पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं थे। संस्थान की शिकारबाडी इलाके में स्थित करोड़ों रुपए की जमीन को हड़पने के लिए खुर्द-बुर्द करने की साजिश रची गई।
फर्जी मार्कशीट से रिश्तेदारों को बांटी नौकरिया
एडहॉक कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी में चहेते रिश्तेदारों को फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरियां दीं। वर्तमान में कई प्रोफेसरों को नियम विरुद्ध प्रमोशन दिए गए जो 2012 को सरकारी नीति के खिलाफ है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से होने वाली नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की ड्यूटी में अयोग्य लोगों, स्टाफ की पत्नियों और यहां तक कि दसवीं पास लोगों को लगा दिया गया। इस गंभीर अनियमितता के चलते राजस्थान विधानसभा में उप मुख्यमंत्री ने भी संस्थान में भ्रष्टाचार को लेकर एसओजी जांच के निर्देश दिए।
परिवारवाद को बताया विवाद की असली जड़
एडहॉक कमेटी के सदस्य एडवोकेट नरेंद्रसिंह कच्छावा ने बताया कि विवाद की बड़ी जड़ परिवारवाद है। सभा की सदस्यता के लिए करीब 800 पूर्व विद्यार्थियों और योग्य लोगों ने आवेदन कर रखा था लेकिन उन्हें दरकिनार कर दिया गया। इसकी जगह सभा के कुछ पदाधिकारियों ने नियमों के खिलाफ जाकर अपने परिवारों के दो दर्जन सदस्यों को सदस्य बना दिया ताकि संस्था पर कब्जा बरकरार रहे। इस फर्जीवाड़े के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जिसकी अगली तारीख 5 मई तय की गई है।

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