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हिंदुस्तान जिंक में 740 से अधिक महिलाएं भारत की सबसे डिजिटल माइनिंग सुविधाओं का कर रही संचालन

-भारत की पहली महिला अंडरग्राउंड माइनिंग प्रोफेशनल से लेकर देश की पहली पूरी तरह से महिलाओं वाली अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम तक, कंपनी माइनि...


-भारत की पहली महिला अंडरग्राउंड माइनिंग प्रोफेशनल से लेकर देश की पहली पूरी तरह से महिलाओं वाली अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम तक, कंपनी माइनिंग के मुख्य कामों में महिलाओं की भागीदारी को नए सिरे से परिभाषित कर रही है

-कंपनी के कुल कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.4 प्रतिशत, जो भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में सबसे अधिक

उदयपुर, 13 जून 2026।  विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और शीर्ष 10 सिल्वर उत्पादकों में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपने मुख्य माइनिंग और स्मेल्टिंग ऑपरेशन्स में 740 से अधिक महिला प्रोफेशनल्स का सम्मान करते हुए ‘इंटरनेशनल वीमेन इन माइनिंग ड‘े मनाया। अंडरग्राउंड माइन्स, डिजिटल कंट्रोल रूम, रिमोट ऑपरेशन्स, माइन रेस्क्यू टीम, स्मेल्टर और नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के साथ, हिंदुस्तान जिंक में माइनिंग सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं का एशिया का सबसे बड़ा ग्रुप है और यह टेक्नोलॉजी-आधारित इंडस्ट्रियल भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी को लगातार नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। अब अपनी वर्कफोर्स में 26.4 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी के साथ, कंपनी भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर में जेंडर डाइवर्सिटी के लिए बेंचमार्क स्थापित कर रही है।

यह उपलब्धि भारत के मुख्य मैन्युफैक्चरिंग और मेटल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव दिखाती है, जो पारंपरिक रूप से टेक्निकल और फ्रंटलाइन भूमिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व, पहुँच और उन्हें बनाए रखने की चुनौतियों से जूझती रही है। हिंदुस्तान जिंक में, यह बदलाव ऑटोमेशन, एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम, टेली-रिमोट ऑपरेशन्स, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समावेशी वर्कप्लेस इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण संभव हुआ है, जिससे माइनिंग सुरक्षित, स्मार्ट और अलग-अलग तरह के टैलेंट के लिए अधिक सुलभ हो गई है।

अपने अनुभव साझा करते हुए हिंदुस्तान जिंक की पहली महिला अंडरग्राउंड माइन मैनेजर, संध्या रसाकतला ने कहा कि, हिंदुस्तान जिंक ने सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक टेक्नोलॉजी-आधारित वर्कप्लेस बनाकर महिलाओं के लिए माइनिंग को अधिक सुलभ बनाया है। अंडरग्राउंड ऑपरेशन्स से लेकर डिजिटल कंट्रोल रूम तक, कंपनी ने ऐसा माहौल बनाया है जहाँ महिलाओं को अहम जिम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हिंदुस्तान जिंक ने मुझे उस क्षेत्र में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया जिसे मैं कभी चुनौतीपूर्ण मानती थी, और आज, हर शिफ्ट मुझे याद दिलाती है कि मैं न केवल माइनिंग में अपना करियर बना रही हूँ, बल्कि अन्य महिलाओं को यह विश्वास दिलाने में मदद कर रही हूँ कि वे भी यहाँ काम कर सकती हैं।

हिंदुस्तान जिंक में महिला प्रोफेशनल कंपनी के हाई-टेक ऑपरेशन्स में योगदान दे रही हैं, जिनमें रिमोट ब्लास्टिंग, टेली-रिमोट इक्विपमेंट हैंडलिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑपरेशनल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म, ऑटोमेटेड प्रोसेस और डिजिटल कंट्रोल रूम शामिल हैं। कंपनी में भारत की पहली महिला अंडरग्राउंड माइनिंग प्रोफेशनल भी कार्यरत हैं और 2023 में कंपनी ने भारत की पहली पूरी तरह से महिलाओं वाली अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम शुरू की, जिससे माइनिंग ऑपरेशन्स में सुरक्षा, क्षमता निर्माण और समान अवसर पर उनका फोकस और मजबूत हुआ।

हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, हिंदुस्तान जिंक में हमारा मानना है कि माइनिंग का भविष्य न केवल टेक्नोलॉजी और पैमाने से तय होगा, बल्कि उन लोगों की विविधता से भी तय होगा जो इसे आकार देते हैं। जैसे-जैसे माइनिंग अधिक ऑटोमेटेड, डिजिटल और इंटेलिजेंस-आधारित होती जा रही है, हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां महिलाएं अंडरग्राउंड ऑपरेशन्स, रेस्क्यू टीमों, कंट्रोल रूम और लीडरशिप भूमिकाओं में आगे बढ़कर नेतृत्व कर सकती हैं। वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत जेंडर डाइवर्सिटी तक पहुंचने का हमारा लक्ष्य केवल वर्कफोर्स का टारगेट नहीं है। यह एक भविष्य के लिए तैयार मेटल्स और माइनिंग ऑर्गनाइजेशन बनाने की प्रतिबद्धता है जहां क्षमता, साहस और इनोवेशन अवसरों को परिभाषित करते हैं।

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी इस सेक्टर को बदल रही है, हिंदुस्तान जिंक महिलाओं के लिए उन भूमिकाओं में भाग लेने के नए रास्ते बना रहा है जिन्हें पारंपरिक माइनिंग माहौल में कभी पहुंच से बाहर माना जाता था। ‘इंटरनेशनल वीमेन इन माइनिंग डे‘ दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण औद्योगिक सेक्टरों में से एक में महिलाओं के बढ़ते योगदान को पहचानने का एक अवसर है। हिंदुस्तान जिंक के लिए, यह पहचान केवल प्रतिनिधित्व से कहीं अधिक है। यह व्यवसाय के ऑपरेशनल कोर में समावेशिता को शामिल करने और महिलाओं को फ्रंटलाइन, टेक्निकल और लीडरशिप भूमिकाओं में काम करने में सक्षम बनाने की है।

हिंदुस्तान जिंक की माइनिंग इंजीनियर नेहल सोलंकी ने कहा कि, जब मैंने करियर के रूप में माइनिंग को चुना, तो मुझे पता था कि मैं एक ऐसे क्षेत्र में कदम रख रही हूं जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम था। आज, मुझे एक ऐसे संस्थान का हिस्सा होने पर गर्व है जहां अवसर क्षमता और महत्वाकांक्षा से तय होते हैं, न कि जेंडर से। कोर माइनिंग ऑपरेशन्स में काम करने से लेकर चौबीस घंटे की शिफ्ट में अत्यधिक कुशल टीमों के साथ योगदान करने तक, मैंने खुद अनुभव किया है कि कैसे हिंदुस्तान जिंक महिलाओं को परंपराओं को चुनौती देने और प्रोफेशनल्स के रूप में आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाता है।

जैसे-जैसे भारत मिनरल सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और भविष्य के लिए तैयार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पर अपना ध्यान बढ़ा रहा है, हिंदुस्तान जिंक का मानना है कि भविष्य में माइनिंग वर्कफोर्स का तकनीकी रूप से एडवांस्ड और विविध होना जरूरी है। कंपनी की तरक्की में मददगार इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इसके जिनक्लूजन इनिशिएटिव का बड़ा हाथ रहा है। यह इनिशिएटिव खास पॉलिसी, सुरक्षा सिस्टम और करियर डेवलपमेंट के मौकों के जरिए महिलाओं और अन्य कर्मचारियों को व्यवस्थित सपोर्ट देता है। हिंदुस्तान जिंक ने ऑटोमेशन, एआई बेस्ड सेफ्टी टूल्स, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और टेली-रिमोट ऑपरेशन्स में भी निवेश किया है, जिससे इसके वर्कप्लेस अधिक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हुए हैं।


 

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