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लफ़्ज़ों की महफ़िल की पितृ दिवस विशेष काव्य गोष्ठी संपन्न, वरिष्ठ शायर शकील अलाउद्दीन सम्मानित

पिता’ विषयक डिजिटल पत्रिका का लोकार्पण, भावपूर्ण रचनाओं से गूंजा साहित्यिक मंच उदयपुर। शहर की साहित्यिक संस्था ‘लफ़्ज़ों की महफ़िल’ के तत्वा...


पिता’ विषयक डिजिटल पत्रिका का लोकार्पण, भावपूर्ण रचनाओं से गूंजा साहित्यिक मंच

उदयपुर। शहर की साहित्यिक संस्था ‘लफ़्ज़ों की महफ़िल’ के तत्वावधान में पितृ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित जून माह की मासिक काव्य गोष्ठी मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस, उदयपुर में साहित्यिक गरिमा और भावनात्मक वातावरण के बीच संपन्न हुई। कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित कवियों, शायरों एवं साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए ‘पिता’ विषय पर अपनी भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया।

संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि कार्यक्रम में कविता, ग़ज़ल, गीत, मुक्तक एवं अन्य साहित्यिक विधाओं की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। रचनाकारों ने पिता के प्रेम, त्याग, संघर्ष और जीवन में उनके अमूल्य योगदान को मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान संस्था द्वारा प्रकाशित ‘पिता’ विषयक विशेष डिजिटल पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। देशभर के रचनाकारों की रचनाओं से सुसज्जित इस विशेषांक में कविताएं, ग़ज़लें, लेख एवं अन्य साहित्यिक रचनाएं शामिल हैं, जो पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का संदेश देती हैं।

संस्था के सचिव एवं शायर शाद उदयपुरी ने बताया कि कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ शायर शकील अलाउद्दीन का सम्मान रहा। साहित्य एवं शायरी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए संस्था द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।

“पिता “ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की वह मजबूत नींव हैं, जिनके त्याग और संस्कार हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं। यह विशेष गोष्ठी उन सभी पिताओं को समर्पित है, जिनकी प्रेरणा हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”

शाद उदयपुरी ने कहा कि “पिता के प्रेम और समर्पण को शब्दों में बांध पाना आसान नहीं है, फिर भी साहित्य के माध्यम से हम अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने का प्रयास करते हैं। यह विशेषांक और आयोजन उन अनकहे एहसासों को समर्पित है, जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, लेकिन शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते।”

काव्य गोष्ठी में डॉ. इक़बाल सागर, आसमा बेगम, शाहिद हुसैन शैदा, इशाक़ फ़ुरक़त, डॉ. नरेश चन्द्र शर्मा, प्रो. निर्मल गर्ग, विजय कुमार ‘नाकाम’, विनोद उपाध्याय, मनोहर डेम्बला, शकील अलाउद्दीन, उपेन्द्र कुमार भट्ट, परवाना अजमेरी, शाद उदयपुरी, रियाज़ अहमद कुरैशी, साबिरा रानी, ओमान सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।

उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं ने इस आयोजन को साहित्य, संवेदना और सम्मान का सुंदर संगम बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम का समापन आपसी सौहार्द, साहित्यिक संवाद और पितृ दिवस की शुभकामनाओं के साथ हुआ।


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