राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ का विरोध, मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री को तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर ‘तुगलकी आदेश’ तत्काल निरस्त ...
राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ का विरोध, मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री को तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर ‘तुगलकी आदेश’ तत्काल निरस्त करने की मांग
उदयपुर। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ ने आरजीएचएस में ₹2,000 से अधिक की ओपीडी जांचों के लिए 13 जुलाई 2026 से लागू की जा रही प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को इस नई व्यवस्था के विरोध में तथ्यात्मक ज्ञापन भेजकर इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है तथा ऐसा नहीं किए जाने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी दी है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष इंजी. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजी. अरविंद कौशल, कोटा ने कहा कि “बीमारी ₹2,000 की सीमा देखकर नहीं आती और न ही डॉक्टर मरीज की जांच उसकी कीमत देखकर लिखता है। जब योग्य चिकित्सक ने जांच को आवश्यक माना है तो फिर टीपीए की मंजूरी का इंतजार क्यों कराया जाए?” उन्होंने कहा कि बुजुर्ग पेंशनर्स को एक से तीन घंटे तक अनुमति के इंतजार में बैठाना आरजीएचएस की कैशलेस एवं सुगम चिकित्सा की मूल भावना के विपरीत है।
सोलंकी ने इस नई व्यवस्था को तुगलकी आदेश बताते हुए कहा कि यदि सरकार को अस्पतालों या डायग्नोस्टिक सेंटरों द्वारा अनावश्यक जांच अथवा फर्जी बिलिंग की आशंका है तो दोषी संस्थानों का ऑडिट कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। कुछ संस्थानों की संभावित अनियमितताओं की सजा लाखों ईमानदार कर्मचारियों और पेंशनर्स को देना न्यायसंगत नहीं है। त्ळभ्ै स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, कोई ‘अनुमति राज’ नहीं।
महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर, उदयपुर; डॉ. राजेंद्र सिंह चावड़ा, जोधपुर; मानफूल मंगलिया, बीकानेर; मूलचंद जाट, जोबनेर तथा डॉ. अरुण कुमार शर्मा, कोटा ने कहा कि डॉक्टर द्वारा आवश्यक बताई गई जांच के बीच पोर्टल, दस्तावेज और ज्च्। की अनुमति की अतिरिक्त दीवार खड़ी करना मरीजों, विशेषकर बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए अनावश्यक परेशानी और उपचार में विलंब का कारण बनेगा।
प्रदेश मंत्री डॉ. भारत सिंह भीमावत, जोधपुर; डॉ. भूपेंद्र उपाध्याय, उदयपुर; इंजी. मोहन लाल चांगवाल, जोबनेर; नेमाराम जाट, बीकानेर तथा महावीर शर्मा, कोटा ने कहा कि सरकार को मरीजों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय संदिग्ध अस्पतालों और जांच केंद्रों की पहचान कर रियल-टाइम ऑडिट, डेटा एनालिटिक्स और कठोर कार्रवाई के माध्यम से अनियमितताओं पर रोक लगानी चाहिए।
महासंघ के संगठन मंत्री इंजी. सुरेंद्र भूषण सहाय, उदयपुर ने कहा कि यदि सरकार ने इस पेंशनर-विरोधी व्यवस्था को तत्काल निरस्त नहीं किया तो प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स से विचार-विमर्श कर लोकतांत्रिक आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
महासंघ ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर से स्पष्ट मांग की है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई ₹2,000 से अधिक की आवश्यक व्च्क् जांचों पर प्री-ऑथराइजेशन की बाध्यता वाला यह “तुगलकी आदेश” तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश अध्यक्ष सोलंकी ने कहा, “डॉक्टर की लिखी जांच पर ₹2,000 की प्रशासनिक लक्ष्मण रेखा पेंशनर्स को स्वीकार नहीं है। पेंशनर्स के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं होगा। सरकार ने आदेश वापस नहीं लिया तो प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स एकजुट होकर लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे।”
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