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यूसीसी जनसुनवाई में सांसद डॉ रावत ने रखी आदिवासी समाज की बात, बिना तैयारी के आए बीएपी सदस्य बैकफुट पर आए

  -सांसद डॉ रावत ने कहा सामाजिक तौर पर बात हमने पहले ही रख दी है, बीएपी एक राजनीतिक दल है। उदयपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर स...

 


-सांसद डॉ रावत ने कहा सामाजिक तौर पर बात हमने पहले ही रख दी है, बीएपी एक राजनीतिक दल है।

उदयपुर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर संभाग स्तरीय जनसुनवाई में सांसद  डॉ मन्नालाल रावत ने सर्व समाज व आदिवासी समाज की बात रखी। जनसुनवाई में सांसद डॉ ने कहा कि उत्तराखंड व गोवा की भांति समान नागरिक संहिता से आदिवासियों को बाहर रखा जाए, साथ ही  धर्मांतरित ईसाई व इस्लाम पर यह लागू होना चाहिए। बीएपी के सदस्य इस मामले में बैकफुट पर आ गए जब उन्होंने राजनीतिक दल के रूप में बात रखी, वे सामाजिक स्तर पर अपनी बात कहने को अधीकृत नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को प्रारूप समिति सदस्य एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छावा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर संभाग स्तरीय जनसुनवाई रखी गई जिसमें विभिन्न समाज-संगठन के प्रतिनिधियों ने मसौदे को तैयार करने से संबंधित अपने-अपने सुझाव दिए। जनसुनवाई में लोकसभा सांसद डॉ मन्नालाल रावत, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमनी, कलेक्टर गौरव अग्रवाल, अतिरिक्त कलेक्टर दीपेंद्र सिंह राठौड़, जितेंद्र ओझा सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे। जनसुनवाई में सांसद रावत में सर्व समाज व आदिवासी समाज की बात रखी। उन्होंने पांचवी व छटी अनुसूची व सुप्रीम कोर्ट व अन्य न्यायालयों द्वारा दिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड व गोवा की भांति समान नागरिक संहिता में आदिवासियों को प्रथागत सकारात्मक व्यवहार के आधार पर इससे बाहर रखा गया है, यहां भी प्रस्तावित बिल में इसी अनुरूप रखना चाहिए, साथ ही हिंदू आदिवासियों से धर्मांतरित होकर ईसाई व इस्लाम में चले गये, लोगों पर यूसीसी लागू होना चाहिए। सांसद डॉ रावत ने जब यह कहा कि यह नई धारा है, जिस पर बीएपी के लोग असमंजस में फंसकर बगलें झांकने लगे। बीएपी का एक सदस्य सामाजिक रूप में तौर पर अपनी बात रखने का प्रयास पर सांसद डॉ रावत ने कहा कि यह सामाजिक तौर बात रखने को अधीकृत नहीं है, ये राजनीतिक दल है। अगर वे किसी सामाजिक संगठन से हैं या व्यक्तिगत भी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं तो अपनी बात रखे। बीएपी नेता के तौर पर जनसुनवाई में राजनीतिक प्राणी ही है। सांसद डॉ रावत ने कहा कि वे उदयपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि बीएपी मात्र एक राजनीतिक दल है। वे अपनी बात एक सांसद के तौर पर रख रहे हैं। सांसद डॉ रावत ने यूसीसी को लेकर सरकार की पहल का भी स्वागत किया और कहा कि यह सबका साथ सबका विकास के अनुरूप है। डॉ रावत ने कहा कि जनजाति समाज की अपनी समृद्व परंपरा है और इसका अपना एक वैभव है। यह पेसा एक्ट व संविधान की पांचवी व छटी अनुसूचि में भी देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी 24 मई को अपने उद्बोधन में कहा था कि यूसीसी से आदिवासियों को अलग रखा जाएगा। जनसुनवाई के दौरान कई ऐसे मौके आए जब बीएपी के लोग सांसद डॉ रावत द्वारा कही जा रही बातों की नकल दोहराते रहे, क्योंकि इस संबंध में उनका कोई अध्ययन और तैयारी ही नहीं थी।

विगत घटनाओं और विचारधाराओं के आधार पर स्मृति में रहे बीएपी एक ऐसी पार्टी है जो झारखंड व छत्तीसगढ़ क्षेत्र में प्रचलित ईसाई एजेंडे को आगे बढ़ाती रही है।

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