-राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से जयपुर में आयोजित हुआ कार्यक्रम -चंद्रप्रकाश गुप्ता ने साझा की 27 वर्षों की सृजन यात्रा -शहीद परिजनों का हु...
-राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से जयपुर में आयोजित हुआ कार्यक्रम
-चंद्रप्रकाश गुप्ता ने साझा की 27 वर्षों की सृजन यात्रा
-शहीद परिजनों का हुआ सम्मान
जयपुर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर एवं शरण्या सेवा संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में सूचना केंद्र सभागार, जयपुर में आयोजित ‘मीट द ऑथर: सृजन संवाद’ कार्यक्रम साहित्य, कला और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायी संगम बन गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक गोरधन लाल शर्मा थे। अतिथियों का स्वागत राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सिंह सोलंकी और शरण्या संस्थान के सचिव कमलेश जैन द्वारा शाल और उपरणा ओढ़ाकर किया गया
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं लेखक चंद्रप्रकाश गुप्ता ने अपनी 27 वर्षों की कला-साधना, राष्ट्रसेवा के संकल्प तथा शहीदों की स्मृति को समर्पित अपने अनूठे अभियान पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सरिता जैन ने किया। उन्होंने चंद्रप्रकाश गुप्ता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित सार्थक संवाद के माध्यम से उनके जीवन, सृजन, संघर्ष, प्रेरणास्रोत और सामाजिक सरोकारों पर विस्तृत चर्चा की। प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों और कला-जगत से जुड़े लोगों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
अपने उद्बोधन में चंद्रप्रकाश गुप्ता ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का सशक्त साधन भी है। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के बाद से वे निरंतर शहीद सैनिकों के तैलचित्र बनाकर उनके परिजनों को भेंट कर रहे हैं। अब तक वे राजस्थान के 400 से अधिक वीर शहीदों के चित्र उनके परिवारों को समर्पित कर चुके हैं। उनकी चर्चित पुस्तक ‘शौर्य और शहादत को सलाम’ इसी 27 वर्षीय राष्ट्रसेवा और कला-साधना की जीवंत गाथा है।
मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने चंद्रप्रकाश गुप्ता के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शहीदों के सम्मान और उनकी स्मृतियों को कला के माध्यम से जीवित रखना समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी कार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
विशिष्ट अतिथि गोरधन लाल शर्मा ने कहा कि साहित्य और कला समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य करते हैं। चंद्रप्रकाश गुप्ता ने अपनी कला और लेखनी के माध्यम से राष्ट्रसेवा का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अनुकरणीय है।
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी क्षण वह रहा जब देश की रक्षा में सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों का सम्मान किया गया। सम्मानित शहीद परिवारों में शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा, शहीद संकल्प यादव, शहीद अभिमन्यु सिंह चौहान व शहीद डॉ. जितेंद्र सिंह के परिजनों को मंच पर सम्मानित कर उनके अद्वितीय बलिदान के प्रति संपूर्ण समाज की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई। उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिजनों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, शहीद परिवारों एवं उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रप्रेम, संवेदनशीलता और सृजनशीलता की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। धन्यवाद की रस्म मनस्वी जैन अदा की।


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