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एक जिला एक उत्पाद नीति में दो बड़े बदलाव, उत्पाद उद्यमों के विस्तार पर भी मिलेगा अनुदान

उदयपुर, 23 मई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लागू एक जिला एक उत्पाद नीति (ओडीओप...

उदयपुर, 23 मई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लागू एक जिला एक उत्पाद नीति (ओडीओपी)-2024 में दो महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। अब जिले के चयनित उत्पाद से जुड़े उद्यमों को विस्तार पर भी मार्जिन मनी अनुदान मिलेगा। साथ ही, निजी संस्थानों के माध्यम से तकनीकी अपग्रेडेशन कराने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस संबंध में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है।

उद्योग एवं वाणिज्य महाप्रबंधक ने बताया कि राज्य बजट 2026-27 में ओडीओपी इकाइयों को विस्तार के लिए भी मार्जिन मनी देने की घोषणा की गई थी। संशोधित प्रावधान के तहत अब विस्तार करने वाली सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को 20 लाख रुपये तक का मार्जिन मनी अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा 15 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का प्रावधान भी किया गया है। इससे पहले यह लाभ केवल नई इकाइयों को ही उपलब्ध था।

उन्होंने बताया कि ओडीओपी नीति के तहत अब निजी संस्थानों के माध्यम से भी तकनीकी अपग्रेडेशन कराया जा सकेगा और इसके लिए 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। पूर्व में यह सुविधा केवल राजकीय संस्थानों के माध्यम से तकनीकी उन्नयन कराने पर ही उपलब्ध थी। इस बदलाव से ओडीओपी इकाइयां नवीनतम तकनीक एवं आधुनिक मशीनों का उपयोग कर कम ऊर्जा खपत के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा ओडीओपी नीति के माध्यम से अधिक से अधिक इकाइयों को लाभान्वित कर स्थानीय उत्पादों को मजबूती प्रदान की जा रही है, ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हों और चयनित उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
मेलों में भाग लेने पर 2 लाख रुपये तक की सहायता
एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 के तहत राज्य के सभी 41 जिलों में एक-एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान की गई है। इस नीति के अंतर्गत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी अनुदान सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा एडवांस्ड टेक्नोलॉजी एवं सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन एवं आईपीआर पर 3 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाती है।
वहीं, विपणन आयोजनों एवं मेलों में भाग लेने पर 2 लाख रुपये तक की सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक दो वर्षों के लिए पुनर्भरण तथा कैटलॉगिंग एवं ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 75 हजार रुपये तक की एकमुश्त सहायता का भी प्रावधान किया गया है।

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