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प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए उठाने होंगे कड़े कदम : के.के. गुप्ता

नाथद्वारा निकाय में स्वच्छता कार्यशाला को किया संबोधित, दिए महत्वपूर्ण टिप्स नाथद्वारा/राजसमंद। स्वच्छ भारत मिशन शहर 2.0 के तहत राजस्थान सरक...


नाथद्वारा निकाय में स्वच्छता कार्यशाला को किया संबोधित, दिए महत्वपूर्ण टिप्स

नाथद्वारा/राजसमंद। स्वच्छ भारत मिशन शहर 2.0 के तहत राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के के गुप्ता ने मंगलवार प्रातः प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी नाथद्वारा में निकाय अधिकारियों की स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा रही है कि प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाए और इन सभी स्थानों को संस्कृति, आस्था और पर्यटन के साथ में जोड़ते हुए हमारी सभ्यता और संस्कृति की एक नई पहचान बने। मुख्यमंत्री महोदय द्वारा प्रदेश में बहुत सारे धार्मिक सर्किट भी विकसित किए गए हैं। इसके पीछे यह सोच रही है कि हमारे पुरातन मंदिर, देवालय, तीर्थ स्थान और धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुंदर वातावरण मिलना चाहिए। विशेष रूप से प्लास्टिक मुक्त धार्मिक स्थलों पर जोर देते हुए कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग आस्था स्थलों की गरिमा को प्रभावित करता है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है।

गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के प्रत्येक मापदंड को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नगर में कहीं भी कचरा और गंदगी दिखाई नहीं देनी चाहिए तथा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए जनसहभागिता अत्यंत जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से प्लास्टिक उपयोग रोकथाम और उसके उन्मूलन पर जोर देते हुए कहा कि नगर में कहीं पर भी प्लास्टिक उड़ता हुआ नजर नहीं आना चाहिए। इसके लिए निकाय प्रशासन और नागरिकों को मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक आज पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

राइजिंग राजस्थान का विजन धरातल पर उतर रहा

उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 9 से 11 दिसंबर 2025 तक आयोजित हुए “राइजिंग राजस्थान” कार्यक्रम के दौरान लगभग 30 हजार करोड़ रुपए के निवेश संबंधी समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर हुए थे। मुख्यमंत्री ने हाल ही में जानकारी दी है कि इन समझौतों में से लगभग 8 हजार करोड़ रुपए के कार्य वर्तमान में प्रदेश में धरातल पर प्रारंभ भी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन निवेशों और विकास योजनाओं से राजस्थान विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन यदि प्रदेश में स्वच्छता नहीं होगी तो विकास के ये सभी प्रयास पूरी तरह उपयोगी सिद्ध नहीं हो पाएंगे। स्वच्छता ही स्वस्थ और विकसित समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गंदगी के कारण लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार होते हैं और राज्य सरकार को मुख्यमंत्री आयुष्मान बीमा योजना के तहत प्रतिवर्ष लगभग 3 हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यदि प्रदेश में बेहतर स्वच्छता व्यवस्था हो और लोग साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहें तो बीमारियों में कमी आएगी तथा यह बड़ी धनराशि राज्य के अन्य विकास कार्यों में उपयोग की जा सकेगी।


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