उदयपुर, 23 मई। वर्तमान युग शस्त्र से ज्यादा शास्त्र का युग है जिसमें वास्तविक युद्ध सीमाओं पर न होकर लोगों के मस्तिष्क में होता है। ऐसी स्थि...
उदयपुर, 23 मई। वर्तमान युग शस्त्र से ज्यादा शास्त्र का युग है जिसमें वास्तविक युद्ध सीमाओं पर न होकर लोगों के मस्तिष्क में होता है। ऐसी स्थिति में अकादमिक जगत का यह कर्तव्य बनता है कि वे राष्ट्र की सामूहिक चेतना एवं अस्मिता के विरुद्ध इतिहास में जो नियोजित षड्यंत्र हुए है,उनका खंडन करे।राष्ट्रीय शिक्षा नीति वह प्रमुख माध्यम है जो सभी तरह के झूठे विमर्शों को ध्वस्त कर राष्ट्र की सही छवि उभारने में सहायक है। प्रो डागा ने आर्यो के बाहर से आगमन,राम मंदिर विवाद,कश्मीर विवाद आदि उदाहरणों से बताया कि किस तरह वैचारिक पूर्वाग्रह के आधार पर झूठा नैरेटिव गढ़ा गया। उन्होंने आग्रह किया कि हम सभी को ऐसे प्रयासों का कठोरता से जवाब देकर राष्ट्रनिर्माण के यज्ञ में अपनी आहुति देनी चाहिए।
प्रो डागा ने शुक्रवार को सुखाडिया विवि एवं माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में राज्य सरकार की सौंध माटी योजना के तहत जनजाति आस्था स्थल विषयक कार्यशाला के समापन समारोह में बोलते हुए उक्त विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सांसद डॉ मन्ना लाल रावत ने कहा कि जनजाति का अपना देवलोक है,उनकी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक परंपराएं है जो सनातन से गहरी जुड़ी हुई है।आज अनेक लोग नियोजित तरीके से गलत भाव के कारण एवं कुछ अनायास सही भाव होते हुए भी गलत भाषा के आधार पर विद्वेष पैदा कर देते है अतः अकादमिक कार्यों के दौरान न केवल भाव सही होना आवश्यक है अपितु भाषा एवं भाव दोनों का सही होना आवश्यक है।जनजाति समुदाय का यह दुर्भाग्य रहा कि उनके गौरवशाली इतिहास एवं उन्नत आध्यात्मिक परम्परा सही परिप्रेक्ष में अब तक सामने नहीं आ पाई है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए टीआरआई के निदेशक ओ पी जैन ने सौंध माटी योजना के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनजाति क्षेत्र के लिए राज्य सरकार की यह अत्यंत महत्त्वाकांक्षी परियोजना है जिसके पूर्ण होने पर जनजाति समुदाय का संपूर्ण इतिहास एवं कला व्यवस्थित रूप से समाज के सामने आ सकेगा।उन्होंने विवि से इस परियोजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने का आग्रह किया। आरम्भ में महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो नीरज शर्मा ने स्वागत करते हुए कहा कि हमे जनजाति समाज की विशिष्ट परंपराओं में अंतर्निहित सनातन की भावना को समझने की दृष्टि विकसित करने की आवश्यकता है। कार्यशाला संयोजक डा बालू दान बारहठ ने बताया कि राजथान सरकार की बजट घोषणा की अनुपालना में जनजाति विकास विभाग द्वारा यह कार्य विवि को प्राप्त हुआ है जिसकी अनुपालना में यह दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।अलग अलग तकनीकी सत्रों में पूर्व सांसद अर्जुन लाल मीणा,जनजाति समाज के वरिष्ठ समाज सेवक सी. बी. मीणा,निदेशक सांख्यिकी सुधीर दवे,प्रो शूर्यवीर सिंह भानावत, डॉ अविनाश पंवार, बनवारी लाल बूमरिया, डॉ सचिन गुप्ता, डॉ टी सी डामोर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ विनीता राजपुरोहित ने धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रो दिग्विजय भटनागर, डॉ कुंजन आचार्य, डॉ पी एस राजपूत,मगन जोशी,नारायण लाल सालवी सहित अनेक संकाय सदस्य,शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

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