उदयपुर 25 जुलाई. राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं वैचारिक चेतना को समर्पित 'समुत्कर्ष समिति' के तत्वावधान में आयोजित 148 वीं सम...
उदयपुर 25 जुलाई. राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं वैचारिक चेतना को समर्पित 'समुत्कर्ष समिति' के तत्वावधान में आयोजित 148 वीं समुत्कर्ष मासिक विचार गोष्ठी शनिवार को आयोजित हुई।
इस गोष्ठी में विद्वान् वक्ताओं ने कहा कि गुरु केवल अक्षर नहीं, अपितु अज्ञान-तिमिर का संहारक है। उनका तत्वज्ञान बुद्धि का परिमार्जन करता है, तो उनके द्वारा सिंचित संस्कार चरित्र को सुदृढ़ता प्रदान करते हैं। ज्ञान और संस्कार के इस मणिकांचन योग से ही अंतस में विवेक का वह अलौकिक आलोक प्रस्फुटित होता है, जो मानव जीवन को सार्थकता और परमार्थ की ओर अग्रसर करता है।
गोष्ठी में संस्कृतविद् पीयूष दशोरा ने कहा कि गुरु तत्व किसी हाड़-मांस के पुतले का नाम नहीं, बल्कि वह एक शाश्वत चेतना और अखंड ऊर्जा का पुंज है। सत्य की खोज में भटकती आत्मा को जब गुरु का संबल प्राप्त होता है, तो समस्त संशयों का स्वतः ही उच्छेदन हो जाता है। गुरु का ज्ञान शिष्यों के अंतस में विवेक की वह अग्नि प्रज्ज्वलित करता है, जो संपूर्ण जीवन को मर्यादा और सत्य के पथ पर अग्रसर रखती है।
इस अवसर पर वक्ताओं का कहना था कि गुरु शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमे 'गु' का मतलब होता है अंधकार और 'रु' का मतलब होता है प्रकाश l यानी गुरु वह शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर जीवन में ज्ञान का प्रकाश और नई चेतना जगाते हैं। एक सच्चा, गुरु वह होता है, जिसने आत्मनियंत्रण की उपलब्धि करने में सर्वव्यापी ब्रह्म के साथ एकरूपता प्राप्त कर ली है। ऐसा व्यक्ति विशेष रूप से किसी साधक को उसकी पूर्णता की ओर आन्तरिक यात्रा में सहायता प्रदान करने में समर्थ होता है।
विचार गोष्ठी में मंगलाचरण का पाठ शिक्षाविद् महेश जोशी ने किया l गरिमा खंडेलवाल ने गुरु महिमा से संबंधित काव्य पाठ किया। चिराग सैनानी, तरुण कुमार दाधीच, विद्या सागर, आर्य सत्य प्रिय ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।समुत्कर्ष पत्रिका के उप संपादक गोविन्द शर्मा द्वारा ने ऑनलाइन जुड़े सभी संभागियों एवं वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि गोष्ठी का यह विमर्श समाज को एक नई वैचारिक दिशा देगा। समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का संचालन शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया ।
इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में विजय कुमार शर्मा, श्यामसुन्दर चौबीसा, गोपाल माली, त्रिभुवन चौबीसा, गोपाल शर्मा,वीणा जोशी, राकेश शर्मा, राजेश सैनी, सीमा गुप्ता, मोहनलाल प्रजापत, संदीप आमेटा, कविता शर्मा रश्मि मेहता, आशा जैन, गिरीश चौबीसा तथा रामेश्वर प्रसाद शर्मा भी सम्मिलित हुए।
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