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ऑन्कोकन्वर्ज 2026 - कैंसर के खिलाफ जंग में नये उपचार कारगर

तीसरे दिन महिलाओं के कैंसर, फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन, यूरो-ऑन्कोलॉजी और इम्यूनोथेरेपी पर हुआ गहन मंथन उदयपुर। कैंसर के इलाज में तेजी से हो रहे ...


तीसरे दिन महिलाओं के कैंसर, फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन, यूरो-ऑन्कोलॉजी और इम्यूनोथेरेपी पर हुआ गहन मंथन

उदयपुर। कैंसर के इलाज में तेजी से हो रहे बदलावों, नई तकनीकों और मरीजों के बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “ट्रेण्ड्स ऑफ ट्रांसफोर्मेशन इन ऑन्कोलॉजी ऑन्कोकन्वर्ज 2026” का समापन हुआ। तीन दिनों तक देशभर से जुटे विशेषज्ञों ने कैंसर उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। पहले दिन हेमेटोलॉजी, कैंसर से जुड़ी जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों और सपोर्टिव केयर पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे दिन पैथोलॉजी, कार्डियो-ऑन्कोलॉजी, ब्रेस्ट, लंग, हेड एंड नेक तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर जैसे विषयों ने चिकित्सा जगत का ध्यान खींचा। तीसरे दिन उपचार के साथ मरीज के भविष्य और जीवन की गुणवत्ता को केंद्र में रखा गया। सम्मेलन की थीम ब्रैकिंग द बेरियर्स-रिसर्च टू प्रेक्टिस रखी गई। 

प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. मनोज महाजन ने बताया कि तीसरे दिन की शुरुआत ऑन्को-एंडोक्राइनोलॉजी से हुई, जिसमें इम्यूनोथेरेपी के कारण होने वाले एंडोक्राइन दुष्प्रभावों और उनके प्रबंधन पर चर्चा हुई। इसके बाद यूरो-ऑन्कोलॉजी सत्र में प्रोस्टेट कैंसर की पीएसए स्क्रीनिंग, ओवरडायग्नोसिस और शुरुआती पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। ब्लैडर कैंसर के उपचार में सामने आ रहे नए विकल्पों पर भी चर्चा हुई।

यहां विषेष रूप से कैंसर मरीजों की फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर हुई चर्चा रही। कैंसर का नाम सुनते ही जहां मरीज और परिवार भविष्य को लेकर डर और अनिश्चितता से घिर जाते हैं, वहीं आधुनिक चिकित्सा अब बीमारी के इलाज के साथ जीवन के सपनों को बचाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने कैंसर उपचार से पहले स्पर्म और ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन जैसे विकल्पों पर चर्चा की। डॉ. महाजन ने कहा कि कैंसर का इलाज जरूरी है, लेकिन इलाज के बाद भी मरीज अपने भविष्य के सपनों को पूरा कर सके यह भी चिकित्सा की बड़ी जिम्मेदारी है।

डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि गायनेको-ऑन्कोलॉजी सत्र में सर्वाइकल कैंसर को भारत से खत्म करने की संभावनाओं, ओवेरियन कैंसर में सर्जरी और कीमोथेरेपी के क्रम तथा मेटास्टेटिक एंडोमेट्रियल कैंसर के उपचार पर चर्चा हुई। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान को लेकर हुई चर्चा ने यह संदेश दिया कि जागरूकता और समय पर चिकित्सा से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

डॉ. अंकुर शर्मा ने बताया कि अंतिम सत्र में डर्माटो-ऑन्कोलॉजी के तहत इम्यूनोथेरेपी से जुड़ी त्वचा संबंधी समस्याओं के निदान और उपचार पर विचार साझा किए गए। इसके बाद क्लोजिंग रिमार्क्स और लंच के साथ सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ।

डॉ. मनोज महाजन ने बताया कि सम्मेलन का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल दवाओं, मशीनों और तकनीक की नहीं है।  मरीज बीमारी के बीच भी जीने की उम्मीद, परिवार के साथ भविष्य और अपने अधूरे सपनों को पूरा करने की इच्छा रखता है। यह सम्मेलन शोध और वास्तविक उपचार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया। विशेषज्ञों के ज्ञान, अनुभव और विचारों ने यह भरोसा मजबूत किया कि कैंसर की चुनौती बड़ी जरूर है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान, सहयोग और मानवीय संवेदना के साथ इसके खिलाफ लड़ाई को नई दिशा दी जा सकती है।

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