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सच्ची पुकार पर भगवान दौड़े चले आते हैं : प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर, 25 अगस्त। नारायण सेवा संस्थान में सावन मास के पावन अवसर पर चल रही ‘भोलेनाथ के चरणों में अपनों से अपनी बात’ शिव कथा में मंगलवार को सं...


उदयपुर, 25 अगस्त। नारायण सेवा संस्थान में सावन मास के पावन अवसर पर चल रही ‘भोलेनाथ के चरणों में अपनों से अपनी बात’ शिव कथा में मंगलवार को संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने व्यास पीठ से राजा अम्बरीष-ऋषि दुर्वासा, राजा रंतिदेव, राजा नृग और गजेन्द्र मोक्ष जैसे प्रेरक प्रसंगों का भावपूर्ण वाचन किया। कथा के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, समर्पण और संकट में ईश्वर पर अटूट विश्वास का संदेश दिया।

गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग की व्याख्या करते हुए अग्रवाल ने बताया कि क्षीर सागर के त्रिकूट पर्वत के घने जंगलों में हाथियों के प्रतापी राजा गजेन्द्र का राज्य था। उसे अपने बल, वैभव और विशाल परिवार पर अभिमान था। एक दिन गजेन्द्र अपने परिवार के साथ सरोवर में जल पीने और क्रीड़ा करने पहुंचा। इसी दौरान एक शक्तिशाली मगरमच्छ ने उसका पैर अपने जबड़े में जकड़ लिया। गजेन्द्र और मगरमच्छ के बीच लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा। परिवार के हाथी भी अंततः साथ छोड़कर चले गए।

उन्होंने कहा कि पानी में मगरमच्छ की शक्ति बढ़ती गई, जबकि गजेन्द्र लगातार कमजोर होता गया। जब उसे अपनी शक्ति और सामर्थ्य पर भरोसा नहीं रहा, तब उसने पूरी आर्तता से भगवान विष्णु को पुकारा। शरणागत भक्त की सच्ची पुकार सुनकर भगवान विष्णु तत्काल पहुंचे और सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजेन्द्र को संकट से मुक्त किया। इस प्रसंग के बाद उन्होंने दोनों के पूर्व जन्मों की कथा भी सुनाई और बताया कि भगवान ने दोनों का उद्धार किया।

अग्रवाल ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी परमात्मा को नहीं भूलता, उसकी सच्ची पुकार ईश्वर तक अवश्य पहुंचती है। अहंकार मनुष्य को अपनी शक्ति का भ्रम देता है, जबकि समर्पण उसे परम शक्ति से जोड़ता है।

कथा के दौरान अग्रवाल ने गाजीपुर के कृष गुप्ता, शाहजहांपुर के जुबेर, आगरा के युवांक और उत्तराखंड के त्रिमोहन सहित दिव्यांगजनों से संवाद किया। संस्थान की सेवाओं से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहे दिव्यांगजन अपने अनुभव साझा करते हुए भावुक हो गए। उनके अनुभवों ने कथा के आध्यात्मिक संदेश को सेवा और संवेदना से जोड़ दिया।

कथा में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा।


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