उदयपुर। उदयपुर नगर निगम में कोर्ट द्वारा आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रशासन पर दबाव में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया ...
उदयपुर। उदयपुर नगर निगम में कोर्ट द्वारा आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रशासन पर दबाव में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है।
सिख कॉलोनी निवासी आयुष अरोड़ा ने बताया कि सम्भागीय आयुक्त श्रीमती प्रज्ञा केवलरमानी एवं जिला कलेक्टर श्री नमित मेहता को ज्ञापन देकर यह गंभीर सवाल उठाया है कि न्यायालय द्वारा आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है तो क्या उदयपुर नगर निगम आयुक्त और नगर निगम भारतीय संविधान, भारतीय कानून, भारतीय न्यायालय, सम्भागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर से भी ऊपर हो गए हैं। आयुष ने बताया कि सिक्ख कॉलोनी, मकान नंबर 59, वार्ड नंबर 35 (पुराना) में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए उदयपुर कोर्ट न्यायालय शहर दक्षिण द्वारा दिनांक 16 मार्च 2023 को प्रकरण संख्या 91/2023 मु.दी में स्पष्ट आदेश पारित किया था कि उक्त संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग व उपभोग नहीं किया जाए। लेकिन 30 महीनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नगर निगम उदयपुर ने कोर्ट की सरेआम अवहेलना की है। सूत्रों के अनुसार, नगर निगम आयुक्त और संबंधित अधिकारी उस अवैध संपत्ति के संचालकों के साथ मिलीभगत में कार्य कर रहे हैं और रसूखदारों के दबाव में कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और परिसर को सीज नही कर रहे है।
यहां तक कि दिनांक 10 सितम्बर 2025 को स्वयं नगर निगम ने तीन दिन का नोटिस जारी करते हुए स्वीकार किया उक्त संपत्ति में कोर्ट के आदेश के बाद भी होटल का संचालन किया जा रहा है जो पूर्णतः गलत है, फिर भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह स्पष्ट करता है कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जानबूझकर भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं।
जब परिवादी ने नगर निगम आयुक्त से इस विषय पर सवाल किया, तो आयुक्त ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मैं स्वयं जांच करवा रहा हूं, जबकि आयुक्त को सिर्फ कोर्ट के आदेशों का पालन करना होता है, उनके आदेश के बाद उनकी ओर से जांच का कोई मतलब नहीं है।
आयुष अरोड़ा ने बताया गया है कि गरीब और असहाय नागरिकों पर निगम का डंडा तुरंत चलता है, लेकिन जब बात रसूखदारों की आती है, तो पूरा निगम नतमस्तक हो जाता है। यह मामला न केवल कानूनी अवहेलना का है बल्कि लोक प्रशासन में व्याप्त लापरवाही और दोहरे मापदंडों की एक जीवंत मिसाल है। अरोडा ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की जाए और कोर्ट के आदेश की तत्काल पालना करवाकर उक्त परिसर को सीज की जाए।
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