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महाराज शक्तिसिंहजी की 484वीं जयंती का भव्य समारोह 27 मई को उदयपुर में

-महाराज शक्तिसिंह जी का मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान  उदयपुर। महाराणा प्रताप सिंह जी के छोटे भ्राता महाराज शक्तिसिंहजी की 484वीं जयंती...


-महाराज शक्तिसिंह जी का मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान 

उदयपुर। महाराणा प्रताप सिंह जी के छोटे भ्राता महाराज शक्तिसिंहजी की 484वीं जयंती का आयोजन 27 मई को सुखाड़िया रंगमंच टाउन हॉल उदयपुर में प्रातः 10 बजे से भव्य समारोह के रूप में किया जाएगा। 

महाराज श्री शक्तिसिंहजी जयंती समारोह के रणधीरसिंह भींडर ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस समारोह की शुरुआत वर्ष 2024 में भींडर राजमहल से हुई थी गत वर्ष 2025 में इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी ऑडिटोरियम, चित्तौड़गढ में भव्य समारोह के रूप में जयंती मनाई गई। अद्भुत संयोग रहा है कि हिन्दू तिथि के अनुसार महाराणा प्रतापजी व महाराज शक्तिसिंहजी का जन्म ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को एक ही दिन हुआ था। महाराज शक्तिसिंह जी का जन्म महाराणा प्रताप के जन्म के दो वर्ष बाद 1542 में हुआ था,ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया महाराणा प्रताप जयंती को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है इसलिए यह निर्णय लिया गया कि 1542 में ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को अंग्रेजी तिथि 27 मई थी उसी दिन महाराज शक्तिसिंह जयंती मनाई जाए।

महाराज शक्तिसिंह स्मारक समिति एवं प्रताप शक्ति सेवा संस्थान के तत्वावधान में इस समारोह का आयोजन किया जाएगा। आयोजन कमेटी द्वारा इस वर्ष सर्व समाज को आमंत्रित किया गया है। इस समारोह के मुख्य अतिथि श्री जी हुजूर एकलिंग दीवान महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ होंगे समारोह की अध्यक्षता महारानी महिमा कुमारी मेवाड़ करेंगी विशिष्ट अतिथि राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, इतिहासकार चन्द्रशेखर शर्मा, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वीर रस के कवि सिद्धार्थ देवल सोशियल मीडिया पर अपनी प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध गोविंद मालवीय होंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि सिद्धार्थ देवल महाराज शक्ति सिंह जी पर ओजस्वी कविता का काव्य पाठ करेंगे। समारोह में मेवाड़ के प्रमुख सोलह उमरावों को भी आमंत्रित किया गया है ।

महाराज शक्तिसिंह जी का मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान है,महाराज शक्तिसिंह जी जिन्होंने 1567-68 में अकबर के चितौड़ पर आक्रमण की सूचना सर्वप्रथम महाराणा उदयसिंह जी को दी थी जिसके कारण ही मेवाड़ राजपरिवार सुरक्षित रह पाया। 1576 हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप जी का पीछा कर रहे खुरासान व मुल्तान मुगल सैनिकों को मारकर प्रताप की रक्षा की फिर स्वयं का घोड़ा प्रताप को भेंटकर युद्ध क्षेत्र से सकुशल निकलने में मदद करने वाले महाराज शक्ति सिंह जी ही थे। हल्दीघाटी में महाराज शक्तिसिंहजी द्वारा दिए गए योगदान के परिणामस्वरूप महाराणा प्रताप जी ने महाराज शक्तिसिंहजी व उनके वंशजों को ‘‘राणावल्लभ’’ की उपाधि प्रदान की। राणावल्लभ का अर्थ होता है ‘‘राणा का अत्यंत प्रिय’’ महाराज शक्ति सिंह जी के 17 पुत्र हुए जिनमे से 8-10 पुत्रों ने विभिन्न युद्धों में मेवाड़ की रक्षार्थ बलिदान दिया।महाराज शक्तिसिंहजी की 484वीं जयंती का भव्य समारोह 27 मई को उदयपुर में 

-महाराज शक्तिसिंह जी का मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान 

उदयपुर। महाराणा प्रताप सिंह जी के छोटे भ्राता महाराज शक्तिसिंहजी की 484वीं जयंती का आयोजन 27 मई को सुखाड़िया रंगमंच टाउन हॉल उदयपुर में प्रातः 10 बजे से भव्य समारोह के रूप में किया जाएगा। 

महाराज श्री शक्तिसिंहजी जयंती समारोह के रणधीरसिंह भींडर ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस समारोह की शुरुआत वर्ष 2024 में भींडर राजमहल से हुई थी गत वर्ष 2025 में इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी ऑडिटोरियम, चित्तौड़गढ में भव्य समारोह के रूप में जयंती मनाई गई। अद्भुत संयोग रहा है कि हिन्दू तिथि के अनुसार महाराणा प्रतापजी व महाराज शक्तिसिंहजी का जन्म ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को एक ही दिन हुआ था। महाराज शक्तिसिंह जी का जन्म महाराणा प्रताप के जन्म के दो वर्ष बाद 1542 में हुआ था,ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया महाराणा प्रताप जयंती को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है इसलिए यह निर्णय लिया गया कि 1542 में ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को अंग्रेजी तिथि 27 मई थी उसी दिन महाराज शक्तिसिंह जयंती मनाई जाए।

महाराज शक्तिसिंह स्मारक समिति एवं प्रताप शक्ति सेवा संस्थान के तत्वावधान में इस समारोह का आयोजन किया जाएगा। आयोजन कमेटी द्वारा इस वर्ष सर्व समाज को आमंत्रित किया गया है। इस समारोह के मुख्य अतिथि श्री जी हुजूर एकलिंग दीवान महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ होंगे समारोह की अध्यक्षता महारानी महिमा कुमारी मेवाड़ करेंगी विशिष्ट अतिथि राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, इतिहासकार चन्द्रशेखर शर्मा, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वीर रस के कवि सिद्धार्थ देवल सोशियल मीडिया पर अपनी प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध गोविंद मालवीय होंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि सिद्धार्थ देवल महाराज शक्ति सिंह जी पर ओजस्वी कविता का काव्य पाठ करेंगे। समारोह में मेवाड़ के प्रमुख सोलह उमरावों को भी आमंत्रित किया गया है ।

महाराज शक्तिसिंह जी का मेवाड़ के इतिहास में अतुलनीय योगदान है,महाराज शक्तिसिंह जी जिन्होंने 1567-68 में अकबर के चितौड़ पर आक्रमण की सूचना सर्वप्रथम महाराणा उदयसिंह जी को दी थी जिसके कारण ही मेवाड़ राजपरिवार सुरक्षित रह पाया। 1576 हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप जी का पीछा कर रहे खुरासान व मुल्तान मुगल सैनिकों को मारकर प्रताप की रक्षा की फिर स्वयं का घोड़ा प्रताप को भेंटकर युद्ध क्षेत्र से सकुशल निकलने में मदद करने वाले महाराज शक्ति सिंह जी ही थे। हल्दीघाटी में महाराज शक्तिसिंहजी द्वारा दिए गए योगदान के परिणामस्वरूप महाराणा प्रताप जी ने महाराज शक्तिसिंहजी व उनके वंशजों को ‘‘राणावल्लभ’’ की उपाधि प्रदान की। राणावल्लभ का अर्थ होता है ‘‘राणा का अत्यंत प्रिय’’ महाराज शक्ति सिंह जी के 17 पुत्र हुए जिनमे से 8-10 पुत्रों ने विभिन्न युद्धों में मेवाड़ की रक्षार्थ बलिदान दिया।

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